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जिला आयुक्त की उपस्थिति में बटद्रवा सत्र प्रबंधन समिति की विशेष आमसभा संपन्न

 


विरासत संरक्षण के विशेष कदम, प्लास्टिक मुक्त बनाने का निर्णय, सांस्कृतिक उपसमिति का गठन


पूजा माहेश्वरी

नगांव, नगांव जिले के बटद्रवा थान-सत्र परिसर में पॉलीथिन एवं प्लास्टिक सामग्री के उपयोग को पूर्णतः बंद करने का निर्णय थान प्रबंधन समिति ने लिया है। आकाशी गंगा तट स्थित आई खेर्सुति सांस्कृतिक मंच पर आयोजित बटद्रवा थान प्रबंधन समिति की एक विशेष आमसभा में यह निर्णय लिया गया। जिला आयुक्त देवाशीष शर्मा की उपस्थिति में आयोजित इस सभा में एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव के तहत गुरुजन की इस पवित्र तीर्थस्थली में पारंपरिक गीत, भाओना तथा सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और शुद्ध अभ्यास को बनाए रखने के लिए एक सांस्कृतिक उपसमिति के गठन का निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार नगांव जिला आयुक्त की देखरेख में गत वर्ष 2 नवंबर को गठित नई प्रबंधन समिति की पहल तथा समिति की निर्धारित नियमावली के आधार पर इस महत्वपूर्ण सभा का आयोजन किया गया था। सभा में नगांव जिला आयुक्त शर्मा के अलावा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष तथा नरोवा सत्र के सत्राधिकार अम्लान ज्योति देव गोस्वामी, साधारण सचिव लाचित बरदलाई सहित बटद्रवा थान प्रबंधन समिति के सदस्य और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

सभा में बटद्रवा की मूल घोषा, बरगीत तथा नृत्य-वाद्य जैसी सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखते हुए उनके शुद्ध स्वरूप में संरक्षण और अभ्यास के लिए ‘संस्कृति चर्चा उपसमिति’ गठित करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही असमिया भाओना की दुर्लभ पांडुलिपियों के संग्रहण तथा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और बटद्रवा थान के इतिहास पर आधारित एक अंग्रेजी ग्रंथ तैयार करने का भी विशेष प्रस्ताव पारित किया गया।

केवल सांस्कृतिक क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक वातावरण को हरित और प्रदूषणमुक्त बनाए रखने पर भी सभा में विशेष जोर दिया गया। विशेष रूप से पिरिका फूल सहित पारंपरिक वृक्षों के रोपण द्वारा वनीकरण करने तथा प्लास्टिक-पॉलीथिन के उपयोग को पूरी तरह कम कर पूरे थान परिसर को स्वच्छ बनाए रखने का संकल्प लिया गया। 'हरित बटद्रवा ’ के निर्माण के लक्ष्य के साथ उठाए गए इन कदमों से बटद्रवा धाम की सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय गरिमा विश्व स्तर पर और अधिक उज्ज्वल होगी, ऐसी आशा व्यक्त की गई।

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