गुवाहाटी, आज डिजिटल युग में एक पुस्तकालय की जिम्मेवारी और बढ़ गई है क्योंकि डिजिटल युग में हमें सही और प्रामाणिक जानकारी सुनिश्चित करनी पड़ती है। जोकि छपी हुई पुस्तकों से ही संभव है। ये बातें आज गुवाहाटी हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराणा ने श्री मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कही। उन्होंने कहा कि एक पुस्तकालय सिर्फ कागज और स्याही का संग्रह नहीं है, बल्कि वह विचारों का समंदर होता है।
श्री मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय में आज इसके शतवार्षिकी कार्यक्रमों का समापन समारोह था। इस अवसर पर पुस्तकालय की 100 वर्षों की यात्रा में इसके अध्यक्ष, मंत्री या कोषाध्यक्ष रह चुके सभी व्यक्तियों या उनके परिजनों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
इससे पहले, पुस्तकालय के अध्यक्ष विनोद रिंगानिया ने कहा कि सौ वर्षों की यात्रा के दौरान इसे कई ऐसे व्यक्तियों का योगदान और सहयोग मिला, जिन्हें पुस्तकों से असीम प्यार रहा है। ऐसे ही कई व्यक्तियों के नामों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने श्री ओंकार पारीख के बारे में बताया, जिन्होंने पुस्तकालय की कई सालों तक सेवा की। उन्होंने पुस्तकालय के नए कार्यक्रम "आओ असमिया सीखें" तथा व्यक्ति विशेष पर केंद्रित व्याख्यानों का उल्लेख किया।
श्रीमती सरोज जालान तथा श्रीमती कांता अग्रवाल के सफल संचालन में आयोजित कार्यक्रम में पुस्तकालय ट्रस्ट के चेयरमैन आनंद पोद्दार ने कमला पोद्दार विद्या ज्योति फाउंडेशन के सहयोग से चलाई जाने वाली छात्रवृत्ति योजना का उल्लेख किया, जिसके तहत हर साल मेधावी छात्रों को एक निश्चित राशि की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। पुस्तकालय के सचिव सिद्धार्थ नवलगढ़िया ने भी छात्रवृत्ति कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया।
पुस्तकालय में पिछले साल शुरू हुए नए कार्यक्रम “उड़ान” के बारे में बोलते हुए, इसकी संयोजक पुष्पा सोनी ने कहा कि यदि हम बच्चों को पुस्तकों से प्यार करना सिखा दें, तो बड़े होने पर उन्हें पुस्तकों की लत लग जाएगी और ज्ञान की लत लगना हमेशा अच्छा होता है।
पुस्तकालय के न्यूजलेटर शब्द संदेश की संपादक, अंशु सारड़ा अन्वि ने न्यूज लेटर के बारे में उपस्थित सभासदों को अवगत कराया। इससे पहले, शब्द संदेश के नए अंक का मुख्य अतिथि श्री सुराणा के हाथों से विमोचन करवाया गया।
पूर्व पदाधिकारियों में से एक प्रमुख, स्वर्गीय शंकर लाल भातरा के पुत्र विनोद कुमार भातरा ने पूर्व पदाधिकारियों के प्रतिनिधि के तौर पर बोलते हुए उन्हें संस्था की ओर से आज याद किए जाने पर कृतज्ञता व्यक्त की।
इससे पहले, सभी दिवंगत हो चुके पूर्व पदाधिकारियों की आत्मा की सद्गति के लिए एक मिनट की मौन प्रार्थना रखी गई।
इस कार्यक्रम के संयोजक श्रीमती सरोज जालान तथा सह संयोजक मुकेश भातरा थे। अंत में, धन्यवाद प्रस्ताव मुकेश भातरा ने रखा।








कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें