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तेजस्विता : नारी शक्ति, संस्कार और सफलता की नई उड़ान



गुवाहाटी की पावन धरती एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है। पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के तत्वावधान में आगामी 8 एवं 9 अगस्त को छत्रीबाड़ी स्थित आसाम महेश्वरी भवन में महिलाओं को ऊंची उड़ान तक ले जाने के उद्देश्य से तेजस्विता नामकरण से महिला सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। आयोजित होने वाला “तेजस्विता” केवल एक महिला सम्मेलन नहीं, बल्कि नारी शक्ति, संस्कार, आत्मविश्वास और नवचेतना का विराट महाकुंभ है। यह आयोजन उस बदलते युग की घोषणा है, जिसमें महिलाएं अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहकर सफलता के खुले आकाश में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार हैं।


पूर्वोत्तर की लगभग 22 महिला शाखाओं की सदस्याओं के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की महिलाओं की भागीदारी इस सम्मेलन को एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगी। “तेजस्विता” का उद्देश्य केवल महिलाओं को एक मंच पर लाना नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक योगदान को पूरे पूर्वोत्तर के समक्ष सशक्त रूप से प्रस्तुत करना है।


“तेजस्विता” : नाम में ही शक्ति का संदेश


“तेजस्विता” शब्द अपने भीतर गहन और व्यापक अर्थ समेटे हुए है। यह केवल चमक या आभा का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मबल, ऊर्जा, ज्ञान, आत्मविश्वास और प्रगति की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह उस प्रकाश का नाम है, जो अंधकार को समाप्त कर नई दिशा देता है। जिस प्रकार खगोल विज्ञान में किसी तारे की ऊर्जा और प्रकाश उसकी तेजस्विता कहलाती है, उसी प्रकार समाज में महिलाओं की शक्ति, उनकी प्रतिभा और उनकी सकारात्मक ऊर्जा ही वास्तविक तेजस्विता है।


प्रतीक चिन्ह में समाहित है संस्कृति और आधुनिकता का संगम


तेजस्विता का प्रतीक चिन्ह अपने आप में एक संपूर्ण विचारधारा को प्रस्तुत करता है। इसमें कमल का पुष्प हमारी संस्कृति, पवित्रता और मजबूत जड़ों का प्रतीक बनकर उभरता है। वहीं ऊपर उठते हाथ आत्मविश्वास, स्वतंत्रता और विजय का संदेश देते हैं।


प्रतीक चिन्ह का सबसे आकर्षक पक्ष वह है, जहां एक महिला की साड़ी या घूंघट विशाल पंखों का रूप ले लेती है। यह संदेश अत्यंत प्रेरणादायक है कि हमारी परंपराएं हमारे लिए बंधन नहीं, बल्कि वही शक्ति हैं जो हमें नई उड़ान देने का सामर्थ्य रखती हैं। यह आधुनिक सोच और सांस्कृतिक मूल्यों का अद्भुत समन्वय है।


विचार, संस्कृति और प्रेरणा का संगम


दो दिवसीय इस भव्य सम्मेलन की रूपरेखा अत्यंत आकर्षक और दूरदर्शी है। सम्मेलन का शुभारंभ 8 अगस्त को शंखनाद और दीप प्रज्वलन के साथ होगा। इसमें राष्ट्रीय एवं प्रांतीय स्तर के अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।


सम्मेलन का विशेष आकर्षण कारगिल युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कप्तान मीरा दवे के साथ विशेष संवाद सत्र होगा। उनका जीवन संघर्ष, साहस और राष्ट्रप्रेम महिलाओं को आत्मविश्वास और देशसेवा की प्रेरणा देगा।


इसके अतिरिक्त हास्य एवं श्रृंगार रस से ओतप्रोत कवि सम्मेलन वातावरण को आनंदमय बनाएगा। वहीं “नारी शक्ति सम्मान एवं सांस्कृतिक संध्या” सम्मेलन का सबसे भावुक और गरिमामयी क्षण सिद्ध होगी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा।


दूसरे दिन का आरंभ ध्यान एवं आत्मिक जागरण सत्र से होगा, जो महिलाओं को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा। इसके पश्चात “सावन रो सिंधरा” कार्यक्रम के माध्यम से राजस्थानी लोक संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की जाएगी। पारंपरिक गीत, नृत्य और वेशभूषा सम्मेलन को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर देंगे।


समाज निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर होगा मंथन


सम्मेलन का बौद्धिक सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें परिवार से लेकर राष्ट्र निर्माण तक महिलाओं की भूमिका पर गंभीर चर्चा होगी। यह सत्र महिलाओं को केवल प्रेरित ही नहीं करेगा, बल्कि उन्हें सामाजिक नेतृत्व की दिशा भी प्रदान करेगा।


संतोष शर्मा के नेतृत्व में ऐतिहासिक पहल


मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी महिला शाखा की अध्यक्ष संतोष शर्मा के सशक्त नेतृत्व में आयोजित यह सम्मेलन पूर्वोत्तर के इतिहास में अपनी तरह का पहला विशाल महिला सम्मेलन माना जा रहा है। इससे पूर्व भी उनके नेतृत्व में पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी युवा मंच की महिला सदस्याओ को लेकर एक सफल सम्मेलन आयोजित किया जा चुका है, जिसकी प्रेरणा से इस आयोजन को और अधिक भव्य स्वरूप दिया गया है।


सम्मेलन की स्वागत अध्यक्ष सरोज मित्तल एवं स्वागत मंत्री सरला काबरा ने इसे केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला जागरण का अभियान बताया है। वहीं सलाहकार इंदिरा जिंदल, शारदा केड़िया, वंदना सोमानी एवं मंजू पाटनी के मार्गदर्शन में विभिन्न समितियों का गठन कर आयोजन को सुव्यवस्थित रूप दिया गया है।


आने वाले वर्षों तक गूंजेगी तेजस्विता


“तेजस्विता” केवल दो दिनों का आयोजन नहीं होगा, बल्कि यह महिलाओं के आत्मविश्वास, संस्कार, नेतृत्व और सामाजिक चेतना का ऐसा उत्सव बनेगा जिसकी गूंज आने वाले वर्षों तक सुनाई देगी। यह सम्मेलन हर उस महिला को नई पहचान देगा, जो अपने परिवार के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


निस्संदेह, “तेजस्विता” पूर्वोत्तर की महिलाओं के लिए एक नई प्रेरणा, नई दिशा और नई उड़ान का प्रतीक बनने जा रहा है। 

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