बंगालमारा क्षेत्र पर फिर उठे गंभीर सवाल, आखिर वर्षों से सक्रिय बताए जा रहे अवैध नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई कब?
लखीमपुर से राजेश राठी और ओमप्रकाश तिवाड़ी की रिपोर्ट
लखीमपुर, लखीमपुर जिले के नारायणपुर उपखंड अंतर्गत ढोलपुर पुलिस ने सोमवार तड़के एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग ₹33.59 लाख मूल्य की संदिग्ध जाली भारतीय मुद्रा (एफआईसीएन) बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, किंतु इसके साथ ही इस घटना ने एक बार फिर उन गंभीर सवालों को जीवंत कर दिया है जो वर्षों से लखीमपुर जिले के बंगालमारा क्षेत्र को लेकर उठते रहे हैं। पुलिस के अनुसार गुप्त सूचना के आधार पर सोमवार सुबह लगभग 5:30 बजे ढोलपुर पुलिस चौकी प्रभारी अंकुरज्योति बरुआ के नेतृत्व में ढोलपुर आउट पोस्ट के सामने विशेष नाका जांच अभियान चलाया गया। इसी दौरान मारुति सुजुकी बलेनो (AS-01-GK-7439) को रोककर तलाशी ली गई। स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति एवं वीडियोग्राफी के बीच हुई तलाशी में वाहन से ₹33,59,500 मूल्य की संदिग्ध जाली भारतीय मुद्रा तथा दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस ने इस मामले में लखीमपुर जिले के बिहपुरिया थाना अंतर्गत दौलतपुर निवासी अफाज उद्दीन के पुत्र हैदर अली (29 वर्ष) तथा स्व. अब्बास अली के पुत्र जहीरुल इस्लाम (28 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया। बरामद वाहन, मोबाइल फोन तथा संदिग्ध जाली नोटों को जब्त कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन बंगालमारा के दौलतपुर क्षेत्र से गुवाहाटी की ओर जा रहा था।हालांकि, यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। जाली भारतीय मुद्रा का कारोबार किसी व्यक्ति विशेष का अपराध भर नहीं माना जाता, बल्कि इसे देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने, वित्तीय व्यवस्था में अविश्वास पैदा करने तथा संगठित अपराधों को बढ़ावा देने वाली गंभीर साजिश के रूप में देखा जाता है। ऐसे मामलों के पीछे अक्सर एक संगठित नेटवर्क कार्य करता है, जिसकी जड़ तक पहुँचना अत्यंत आवश्यक होता है। गौरतलब है कि लखीमपुर जिले के बंगालमारा क्षेत्र का नाम समय-समय पर विभिन्न आपराधिक मामलों की चर्चाओं में सामने आता रहा है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह आरोप और चर्चा होती रही है कि इस क्षेत्र में जाली नोटों के अलावा नकली सोने की तस्करी, मादक पदार्थों के अवैध कारोबार तथा अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क सक्रिय हो सकते हैं। इन दावों की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसियों द्वारा की जानी चाहिए, किंतु बार-बार सामने आने वाली घटनाएँ यह अवश्य संकेत देती हैं कि इस पूरे क्षेत्र की व्यापक और गहन जांच समय की मांग बन चुकी है। आम जनता के बीच यह प्रश्न भी लगातार उठ रहा है कि यदि वर्षों से इस क्षेत्र का नाम विभिन्न अवैध गतिविधियों के संदर्भ में सामने आता रहा है और प्रशासन भी समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है, तो आखिर इस पूरे नेटवर्क का स्थायी रूप से पर्दाफाश अब तक क्यों नहीं हो पाया? क्या केवल छोटे वाहकों और स्थानीय आरोपियों की गिरफ्तारी से इस समस्या का समाधान संभव है, या फिर उन लोगों तक पहुँचना अधिक आवश्यक है जो पर्दे के पीछे बैठकर इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं? जनहित में अनेक नागरिकों का मानना है कि सरकार, पुलिस तथा अन्य सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों को इस पूरे क्षेत्र में व्यापक, सुनियोजित और सघन तलाशी एवं जांच अभियान चलाकर हर संदिग्ध गतिविधि की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है, तो संभव है कि कई ऐसे तथ्य सामने आएँ जो वर्षों से छिपे हुए हैं और जिनसे इन संगठित अपराधों की वास्तविक जड़ तक पहुँचा जा सके। आज सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि समय-समय पर जाली नोटों सहित अन्य गंभीर मामलों में गिरफ्तारियाँ होती रही हैं, तो फिर इन नेटवर्कों का पूरी तरह सफाया क्यों नहीं हो पाया? क्या इसके पीछे केवल अपराधियों की संगठित कार्यप्रणाली है, या फिर जांच और कार्रवाई के स्तर पर ऐसी चुनौतियाँ हैं जिनका समाधान अभी तक नहीं हो सका? इन प्रश्नों का उत्तर सरकार और संबंधित एजेंसियों को ही देना होगा। ढोलपुर पुलिस की यह कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन यदि इस सफलता को पूरे नेटवर्क के खात्मे तक नहीं पहुँचाया गया, तो ऐसी बरामदगियाँ भविष्य में भी दोहराई जा सकती हैं। देश की आर्थिक सुरक्षा, युवाओं के भविष्य और समाज में कानून के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए अब आवश्यकता केवल गिरफ्तारी की नहीं, बल्कि इस पूरे संगठित अपराध तंत्र की जड़ों तक पहुँचकर उसे पूरी तरह ध्वस्त करने की है। यही आज जनहित की सबसे बड़ी अपेक्षा भी है।








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