पूजा माहेश्वरी
नगांव: दिगंबर जैन मंदिर, जागीरोड में विराजित आचार्य महाश्रमण जी की के विद्वान सुशिष्य मुनि श्री आनंद कुमार जी “कालू” एवं सहवर्ती मुनि श्री विकास कुमार जी पत्रकारो से मुखातिब होते हुए विशेष साक्षात्कार दिया। इस दौरान मुनि श्री ने अपने विहार, चातुर्मास, भगवान महावीर के सिद्धांतों तथा आचार्य परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। साक्षात्कार में मुनि श्री ने बताया कि गुरु इंगित के अनुसार उनका विहार राजस्थान के बायतू से प्रारंभ हुआ। इसके पश्चात उनका प्रथम चातुर्मास वीरगंज (नेपाल), द्वितीय चातुर्मास अररिया कोर्ट, तृतीय चातुर्मास सिलीगुड़ी में सम्पन्न हुआ तथा इस वर्ष उनका चातुर्मास गुवाहाटी में होने जा रहा है। मुनि श्री ने कहा कि विहार के दौरान उन्हें देश के अनेक क्षेत्रों में जाने, विभिन्न संस्कृतियों से जुड़ने तथा धर्म का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का अवसर मिला। उन्होंने कहा, “मैं अनेक क्षेत्रों का परस कर यहाँ तक पहुँचा हूँ।”
मुनि श्री सिलीगुड़ी से विहार कर धुबड़ी, बरपेटा, खरुपेटिया, तेजपुर, नोगाँव आदि क्षेत्र परस्ते हुए आज जागीरोड पहुँचे।
साक्षात्कार में उन्होंने भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य, संयम, करुणा और आत्मकल्याण के सिद्धांतों की सरल एवं प्रेरक व्याख्या करते हुए बताया कि ये शिक्षाएँ आज भी मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करती हैं।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में मुनि श्री आनंद कुमार जी “कालू” ने कहा कि आचार्य श्री तुलसी जब भी किसी मंदिर अथवा श्रेष्ठ धार्मिक स्थल पर जाते थे, तो यह संदेश देते थे कि “दिगंबर और श्वेतांबर दोनों की आत्मा एक है।” उन्होंने बताया कि आत्मा में अनंत शक्तियां निहित हैं और व्यक्ति को उन शक्तियों के जागरण हेतु आध्यात्मिक साधना एवं सकारात्मक चिंतन अपनाना चाहिए। मुनि श्री ने अपने प्रवचन में चार भावनाओं का सुंदर विवेचन करते हुए जीवन में सकारात्मक सोच, सद्भाव और आत्मविकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा प्रदत्त तीन सूत्र—नैतिकता, नशामुक्ति एवं सद्भावना—को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
मुनि श्री ने आचार्य श्री महाश्रमण जी के व्यक्तित्व, उनके अनुशासन, पदयात्रा, नैतिक जागरण और मानवता के लिए किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि आचार्यश्री का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है तथा उनके संदेशों को जन-जन तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। मुनि श्री आनंद कुमार जी वर्षों तक शासन मुनि श्री जतनमलजी स्वामी के साथ रहे एवं मुनि श्री विकास कुमार जी लगभग ८.५ वर्षों तक छापर सेवा केन्द्र में सेवारथ थे। साक्षात्कार के अंत में पत्रकारों ने मुनि श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके प्रेरणादायी विचारों को सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक समाज तक पहुँचाने का संकल्प व्यक्त किया।
इस अवसर पर अशोक गंगवाल, दिनेश भंडारी, प्रकाश फुलफ़गर, प्रदीप डूंगरवाल, सुरेंद्र डूंगरवाल, प्रमोद गोलचा, मनोज डूंगरवाल, रामगोपाल जैन, संजय छाबड़ा, सुनील जैन, हनुमान प्रसाद चाण्डक, जगदीश प्रसाद अग्रवाल, पारस सोनी, आदि श्रावक उपस्थित थे। मरिगांव, बोगोरा, भगतगांव जागीरोड, गुवाहाटी, नगांव, मरियाबाड़ी, आदि गाँवों से भी लोग उपस्थित थे।








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