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पांचवां सज्जन जैन स्मृति साहित्य पुरस्कार सृंजना शर्मा को प्रदान

 


गुवाहाटी। व्यवसायी वर्ग ने हमेशा साहित्य और साहित्यिक संस्थाओं को प्रोत्साहन दिया है। यदि व्यवसायी समाज का सहयोग न मिले तो साहित्यिक संस्थाओं को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ये विचार असमिया साहित्य के प्रख्यात समालोचक, लेखक एवं अनुवादक डॉ. आनंद बरमुदै ने श्री मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय में आयोजित पांचवें सज्जन जैन स्मृति साहित्य पुरस्कार प्रदान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।


द्विवार्षिक रूप से प्रदान किए जाने वाले इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए इस वर्ष नवोदित कहानीकार सृंजना शर्मा को उनके प्रथम कहानी संग्रह “गल्पर शाक-पाचलि” के लिए चुना गया। पुरस्कार स्वरूप उन्हें मानपत्र, अंगवस्त्र, शराई तथा 21,000 रुपये की नगद राशि प्रदान की गई। इस पुस्तक का प्रकाशन गुवाहाटी के प्रकाशन संस्थान आंक-बाक द्वारा किया गया है।


पुरस्कार ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में सृंजना शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपनी पहली कहानी नौवीं कक्षा में अध्ययन के दौरान लिखी थी। उन्होंने कहा कि मानव मन के द्वंद्व और निस्संगता के प्रश्न उन्हें सदैव आकर्षित करते रहे हैं तथा साहित्य उनके लिए एकांत और अंतर्द्वंद्व से बाहर आने का सशक्त माध्यम है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पुस्तकालय के अध्यक्ष विनोद रिंगानिया ने कहा कि असमिया संस्कृति में भाषा को ‘जननी’ का दर्जा दिया गया है। आज भी अनेक लेखक अपनी मातृभाषा में सृजन कर रहे हैं, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यद्यपि पुस्तकालय के नाम के साथ ‘हिंदी’ शब्द जुड़ा है, फिर भी यहां असमिया और अंग्रेजी भाषा के श्रेष्ठ साहित्य का भी समृद्ध संग्रह उपलब्ध है, जिसे निरंतर बढ़ाया जा रहा है।


पुस्तकालय ट्रस्ट के चेयरमैन आनंद पोद्दार ने कहा कि नई पीढ़ी में पठन-पाठन की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से पुस्तकालय में बच्चों के लिए विशेष रूप से ‘उड़ान’ कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। इस पहल को बच्चों का उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है, जो भविष्य के लिए आशा का संदेश है।


एसएम फाउंडेशन की ओर से ललिता जैन ने कहा कि इस पुरस्कार के माध्यम से स्वर्गीय सज्जन जैन की स्मृतियां आज भी जीवंत बनी हुई हैं। उनके विचार और कार्य समाज तथा परिवार के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। इससे पूर्व कार्यकारिणी सदस्य अंशु सारड़ा अन्वि ने स्वर्गीय सज्जन जैन का परिचय देते हुए बताया कि उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और साहित्य से जुड़ी अनेक परियोजनाओं को सदैव प्रोत्साहित किया।


पुरस्कार समिति के संयोजक किशोर जैन ने बताया कि इस वर्ष पुरस्कार के लिए कुल 70 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। जूरी की अनुशंसा पर सृंजना शर्मा के कहानी संग्रह “गल्पर शाक-पाचलि” का चयन किया गया। जूरी की ओर से प्रख्यात असमिया कवयित्री एवं समीक्षक लुत्फा हानूम सलीमा बेगम ने पुरस्कृत कृति की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि नई पीढ़ी अपनी स्वतंत्र सोच के साथ आगे बढ़ रही है और उसकी रचनात्मक अभिव्यक्ति में किसी प्रकार का अवरोध नहीं होना चाहिए।


कार्यक्रम का संचालन पुस्तकालय के उपाध्यक्ष अशोक सिवोटिया ने किया। उड़ान परियोजना की संयोजक पुष्पा सोनी ने मुख्य अतिथि का परिचय कराया, जबकि बौद्धिक विकास समिति की संयोजक कांता अग्रवाल ने मानपत्र का वाचन किया। कार्यकारिणी सदस्य सविता जोशी ने सृंजना शर्मा का परिचय प्रस्तुत किया। अंत में सचिव सिद्धार्थ नवलगढ़िया ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।


समारोह में जैन परिवार की ओर से स्वर्गीय सज्जन जैन के भ्राता शरद जैन सहित कैलाश लोहिया, सुभाष सीकरिया, डॉ. सुधा श्रीवास्तव, पुस्तकालय के पूर्व अध्यक्ष अनिल जैना, रवि अजितसरिया, नारायण खाकोलिया तथा अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



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