साहस की मिसाल बनी आशा मालवीय - Rise Plus

NEWS

Rise Plus

असम का सबसे सक्रिय हिंदी डिजिटल मीडिया


Post Top Ad

साहस की मिसाल बनी आशा मालवीय



लखीमपुर से राजेश राठी और ओमप्रकाश तिवारी की रिपोर्ट


लखीमपुर, जब लक्ष्य बड़ा हो, इरादे मजबूत हों और मन में राष्ट्रसेवा तथा समाज जागरण का संकल्प हो, तब कठिन से कठिन राह भी आसान प्रतीत होने लगती है। इसी दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस और आत्मविश्वास की सजीव प्रतिमूर्ति बनकर देशभर में महिला सशक्तिकरण का संदेश दे रही मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध साइकिलिस्ट, राष्ट्रीय स्तर की एथलीट एवं पर्वतारोही आशा मालवीय अपनी ऐतिहासिक साइकिल यात्रा के दौरान लखीमपुर पहुंचीं।


लखीमपुर आगमन पर रविवार सुबह 11 बजे लखीमपुर प्रेस क्लब द्वारा उनका आत्मीय स्वागत किया गया। असम की परंपरा के अनुरूप उन्हें असमिया फूलाम गमछा भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में आशा मालवीय ने पत्रकारों से खुलकर बातचीत की और अपनी अब तक की लंबी एवं चुनौतीपूर्ण यात्रा के अनुभव साझा किए।


उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक व्यक्तिगत अभियान नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं और बेटियों के लिए आत्मविश्वास, साहस और आत्मनिर्भरता का संदेश लेकर निकला एक सामाजिक जागरण अभियान है। उनका उद्देश्य यह सिद्ध करना है कि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के बल पर महिलाएं जीवन की हर बाधा को पार कर असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्यों को भी हासिल कर सकती हैं।


मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील स्थित नटाराम गांव की निवासी आशा मालवीय एक साधारण मजदूर परिवार से आती हैं। सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बीच पली-बढ़ी आशा ने परिस्थितियों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। बचपन से खेलों के प्रति रुचि रखने वाली आशा ने अथक परिश्रम और संघर्ष के बल पर राष्ट्रीय स्तर की एथलीट के रूप में पहचान बनाई। इसके साथ ही उन्होंने पर्वतारोहण और साइकिलिंग जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कीं। आज वे देशभर की युवतियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।


आशा मालवीय ने बताया कि अपनी अखिल भारतीय साइकिल यात्रा का शुभारंभ उन्होंने 11 जनवरी को भारतीय सेना दिवस के अवसर पर राजस्थान की राजधानी जयपुर से किया था। भारतीय सेना के शौर्य, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से प्रेरित यह यात्रा महिलाओं को उनके अधिकारों, क्षमताओं और आत्मबल के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से निकाली गई है।


उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान वे विभिन्न शहरों, कस्बों और गांवों में लोगों से संवाद कर महिलाओं को शिक्षा, आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा तथा सामाजिक नेतृत्व के लिए आगे आने हेतु प्रेरित कर रही हैं।


आशा मालवीय ने बताया कि लखीमपुर पहुंचने तक वे 7,970 किलोमीटर से अधिक की दूरी साइकिल से तय कर चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों, मौसम की चुनौतियों और लंबे सफर की कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उनके हौसले कभी कमजोर नहीं पड़े। उन्होंने कहा कि मार्ग में मिलने वाले लोगों का प्रेम, सहयोग और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जो उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।


उन्होंने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, खेल, सेना, प्रशासन और व्यापार सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। ऐसे समय में आवश्यक है कि प्रत्येक लड़की स्वयं पर विश्वास करे और अपने सपनों को साकार करने के लिए निर्भीक होकर आगे बढ़े। उन्होंने कहा, "यदि एक मजदूर की बेटी पूरे देश में अकेले साइकिल यात्रा कर सकती है, तो देश की प्रत्येक बेटी भी अपने जीवन की ऊंचाइयों को छू सकती है।"


असम पहुंचने पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य उनकी यात्रा का दसवां पड़ाव है। उन्होंने महिला सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास के क्षेत्र में असम सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा राज्य की जनता के प्रेम, सम्मान और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य और लोगों की आत्मीयता ने उन्हें अत्यंत प्रभावित किया है।


आशा मालवीय ने बताया कि उनकी यह ऐतिहासिक यात्रा अरुणाचल प्रदेश के किबिथू में जाकर संपन्न होगी, जिसे भारत का पूर्वी छोर माना जाता है। वहां पहुंचकर वे अपनी इस लंबी और प्रेरणादायक यात्रा का समापन करेंगी। हालांकि उनका मानना है कि यह केवल एक यात्रा का अंत नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक जागरण के एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।


उल्लेखनीय है कि आशा मालवीय अब तक अपने विभिन्न अभियानों और यात्राओं के माध्यम से 65 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी साइकिल से तय कर चुकी हैं। उनके साहस, संघर्ष, समर्पण और राष्ट्रप्रेम ने उन्हें देशभर में एक अलग पहचान दिलाई है। उनकी यह यात्रा नारी शक्ति, आत्मविश्वास, देशभक्ति, सामाजिक जागरूकता और अटूट संकल्प का ऐसा संदेश बन चुकी है, जो देश की लाखों महिलाओं और युवाओं को अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा प्रदान कर रही है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नियमित रूप से WhatsApp पर हमारी खबर प्राप्त करने के लिए दिए गए 'SUBSCRIBE' बटन पर क्लिक करें