श्रीकृष्ण भक्ति में सराबोर हुए श्रद्धालु, भजन-कीर्तन और जयघोष से गूंजा ठाकुरवाड़ी मंदिर परिसर
लखीमपुर, स्थानीय श्री श्री सीतारामजी ठाकुरवाड़ी मंदिर प्रांगण में मारवाड़ी सम्मेलन महिला शाखा के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय अमृतमयी श्रीकृष्ण कथा एवं धार्मिक अनुष्ठान का सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच भव्य समापन हुआ। चार दिनों तक चले इस आयोजन ने पूरे नगर को कृष्णमय वातावरण से सराबोर कर दिया।
मंदिर परिसर में सुबह से देर रात तक भजन-कीर्तन, मंगल गीत, हरिनाम संकीर्तन और “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष गूंजते रहे। नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे और भक्ति रस में डूबे दिखाई दिए।
राजस्थान के नोखा से पधारी सुप्रसिद्ध कथा वाचिका सुश्री मोनिका पारीक ने अपनी ओजस्वी एवं भावपूर्ण वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं का मनोहारी वर्णन किया। उनकी सहज और सरस शैली ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि जो भक्त निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करता है, भगवान स्वयं उसकी आवश्यकताओं का भार वहन करते हैं। उन्होंने भक्ति, प्रेम, करुणा और अहंकार त्याग का संदेश देते हुए गोवर्धन पूजा प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया तथा बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने प्रकृति संरक्षण और कर्मप्रधान जीवन का संदेश दिया।
गिरिराज धारण प्रसंग के दौरान श्रद्धालु “गिरिराज धरण की जय” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे। वहीं गोपियों के निष्कलंक प्रेम, महा रास और अहंकार त्याग की प्रेरणादायी कथा ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
कथा में कंस वध, अक्रूर प्रसंग, मथुरा गमन, कुब्जा उद्धार, देवकी-वसुदेव की मुक्ति, महाराज उग्रसेन का पुनः राज्याभिषेक तथा गुरु दक्षिणा स्वरूप गुरु पुत्र को यमलोक से वापस लाने जैसे प्रसंगों का भी प्रेरक वर्णन किया गया। उद्धव और गोपियों के संवाद के माध्यम से ज्ञान और भक्ति के अंतर को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से समझाया गया।
भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी विवाह प्रसंग को श्रद्धालुओं ने मंगल गीतों, पुष्पवर्षा और उत्सवी वातावरण के बीच हर्षोल्लास से मनाया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा परिसर द्वारका नगरी में परिवर्तित हो गया हो।
कथा के अंतिम चरण में श्रीकृष्ण-सुदामा चरित्र का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया, जिसने मित्रता, समर्पण और निस्वार्थ प्रेम का संदेश देते हुए अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं।
चार दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का समापन सोमवार प्रातः वैदिक मंत्रोच्चार, हवन एवं पूर्णाहुति के साथ हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया।
मारवाड़ी सम्मेलन महिला शाखा की अध्यक्षा सुषमा लखोटिया एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने आयोजन की सफलता पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी समाजबंधुओं, श्रद्धालुओं और सेवाभावी कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग, समर्पण एवं धार्मिक आस्था से यह भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।








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