डिब्रूगढ़ से ज्योति खाखोलीया की रिपोर्ट
डिब्रूगढ़, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर डिब्रूगढ़ प्रेस क्लब ने 171 बटालियन सीआरपीएफ तथा वन विभाग के सहयोग से चौकीडींगी स्थित प्रेस क्लब परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और हरित आवरण के विस्तार का संदेश देना था।
कार्यक्रम में सीआरपीएफ के डीआईजी (ऑपरेशंस) प्रभाकर त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं सीआरपीएफ 171 बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर एस. केंगू एवं पंकज पी. शाह, द्वितीय-इन-कमांड संजय मारवाड़, डिब्रूगढ़ जिला खेल संघ (डीडीएसए) के महासचिव एवं पूर्व रणजी क्रिकेटर कामाख्या सैकिया, ऑल इंडिया रेडियो डिब्रूगढ़ के पूर्व कार्यक्रम प्रमुख लोहित डेका तथा डॉ. राधाकृष्णन स्कूल ऑफ आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस के निदेशक एवं प्राचार्य बिकाश गोगोई विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
डिब्रूगढ़ प्रेस क्लब के अध्यक्ष मानस ज्योति दत्ता, महासचिव रिपुनजॉय दास सहित क्लब के अन्य पदाधिकारी और सदस्य भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन महासचिव रिपुनजॉय दास ने किया।
कार्यक्रम के दौरान डीआईजी प्रभाकर त्रिपाठी के नेतृत्व में अतिथियों एवं प्रेस क्लब के सदस्यों ने नाहर वृक्ष के पौधे लगाए। यह वृक्षारोपण अभियान महान असमिया गायक जुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित किया गया, जिन्हें नाहर वृक्ष से विशेष लगाव था।
सभा को संबोधित करते हुए डीआईजी त्रिपाठी ने पेड़ों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान ऑक्सीजन का महत्व पूरी दुनिया ने समझा। उन्होंने कहा, “कोविड के समय मरीजों के लिए ऑक्सीजन ही सबसे बड़ी आवश्यकता थी और हमें यह ऑक्सीजन पेड़ों से ही प्राप्त होती है।” उन्होंने लोगों से अधिकाधिक वृक्ष लगाने तथा मौजूदा हरित आवरण के संरक्षण का आह्वान किया।
विशेष अतिथि लोहित डेका ने अपने संबोधन में कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एक पौधे को वृक्ष बनने तक संरक्षण और उचित देखरेख की जरूरत होती है।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों को डिब्रूगढ़ प्रेस क्लब की ओर से स्मृति-चिह्न एवं पारंपरिक असमिया गमोचा भेंट कर सम्मानित किया गया। यह आयोजन विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में देशभर में चलाए जा रहे पर्यावरण संरक्षण अभियानों की श्रृंखला का हिस्सा रहा।








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