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धेमाजी में बाढ़ का विकराल रूप : तेज बहाव में बहा लोहे का पुल, रेलवे पुल भी खतरे में



हजारों लोग प्रभावित, 46 गांव जलमग्न; राहत एवं बचाव अभियान तेज, मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को मौके पर डटे रहने के दिए निर्देश


लखीमपुर से राजेश राठी और ओमप्रकाश तिवाड़ी की रिपोर्ट 


लखीमपुर, असम में लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा तथा अरुणाचल प्रदेश से आने वाले तीव्र जलप्रवाह ने धेमाजी जिले में बाढ़ की स्थिति को अत्यंत गंभीर बना दिया है। उफनती नदियों ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। अनेक गांव जलमग्न हो गए हैं, सड़क एवं रेल संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है, हजारों लोग बाढ़ की चपेट में हैं और कृषि भूमि भी बड़े पैमाने पर जलमग्न हो गई है। प्रशासन, एसडीआरएफ तथा एनडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार जुटी हुई हैं। रविवार को धेमाजी की केमी नदी पर लगभग एक वर्ष पूर्व निर्मित लोहे का पुल तेज बहाव की भेंट चढ़ गया। पुल बह जाने से आसपास के कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया, जिससे स्थानीय लोगों के सामने आवागमन का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार रविवार सुबह लगभग 11 बजे अरुणाचल प्रदेश की ओर से नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी आना शुरू हुआ। मात्र आधे घंटे के भीतर जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया और करीब 11:30 बजे उफनती केमी नदी अपने साथ पूरे लोहे के पुल को बहाकर ले गई। ग्रामीणों ने बताया कि पुल निर्माण के समय ही उन्होंने प्रशासन से लोहे के अस्थायी पुल के स्थान पर स्थायी कंक्रीट पुल बनाने की मांग की थी। उनका कहना था कि केमी नदी का जलप्रवाह हर वर्ष अत्यंत तीव्र रहता है और लोहे का पुल लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह पाएगा। लेकिन उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया और पहली ही बड़ी बाढ़ में पुल बह जाने से उनकी आशंकाएं सच साबित हो गईं। पुल टूटने का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों और किसानों पर पड़ने की आशंका है। आसपास के अनेक गांवों के छात्र-छात्राएं इसी मार्ग से विद्यालयों तक पहुंचते हैं तथा उनकी परीक्षाएं भी निकट हैं। वहीं खरीफ फसलों के मौसम में किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने और कृषि कार्य करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। उधर धेमाजी के सिलापथार क्षेत्र में सिमेन नदी का भीषण कटाव लगातार जारी है। तेज धारा ने दीपा रेलवे पुल को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे पुल का एक हिस्सा ध्वस्त होकर नदी में समा गया। मुरकोंगसेलेक और गुवाहाटी को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण रेलवे संपर्क के प्रभावित होने से जोनाई क्षेत्र का रेल संपर्क बाधित हो गया है। अब जोनाई के यात्रियों को गुवाहाटी अथवा अन्य स्थानों की यात्रा के लिए सिलापथार अथवा आर्चीपाथर से ट्रेन पकड़नी पड़ेगी। इसी बीच लेकुनदी में जलस्तर बढ़ने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-515 पर कई स्थानों पर पानी बहने लगा, जिससे दुपहिया और चारपहिया वाहनों का आवागमन घंटों बाधित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। दूसरी ओर दिखारी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से नदी के बीच फंसे 16 लोगों में से अब तक 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। शेष लोगों को निकालने के लिए एसडीआरएफ तथा एनडीआरएफ की संयुक्त टीमें लगातार बचाव अभियान चला रही हैं। लखीमपुर के सांसद प्रदान बरुवा तथा जोनाई के विधायक भुवन पेगु ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने बचाव अभियान में जुटे अधिकारियों, एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ के जवानों के साहस और समर्पण की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। साथ ही संबंधित विभागों को राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता तथा आवश्यक सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि राज्य सरकार धेमाजी सहित सभी प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संकट की इस घड़ी में सरकार पूरी मजबूती से प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने जल संसाधन मंत्री सुशांत बोरगोहाईं तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री केशव महंत को धेमाजी में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की प्रत्यक्ष निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने तथा प्रभावित लोगों को शीघ्र राहत पहुंचाने के लिए सभी सरकारी एजेंसियां युद्धस्तर पर कार्य कर रही हैं। राज्य के डिजास्टर रिपोर्टिंग एंड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम के अनुसार अब तक बाढ़ से 46 गांवों के लगभग 1,541 लोग प्रभावित हुए हैं। शिवसागर जिले की दिखौ नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि धेमाजी के गोगामुख और जोनाई, डिब्रूगढ़ के चबुआ तथा लखीमपुर के सुबनसिरी राजस्व मंडल में बाढ़ का व्यापक असर देखा जा रहा है। बाढ़ के कारण कुल 1,659.1 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है, जिसमें धेमाजी की 994.1 हेक्टेयर तथा लखीमपुर की 665 हेक्टेयर कृषि भूमि सर्वाधिक प्रभावित हुई है। प्रभावित लोगों में डिब्रूगढ़ में 935, धेमाजी में 565 तथा लखीमपुर में 41 लोगों के प्रभावित होने की पुष्टि हुई है। 


भारी वर्षा से रेलवे पुल के निकट कटाव, रेल सेवाएं अगली सूचना तक स्थगित


लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा के कारण पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने आर्चीपाथर और सिमेन चापरी रेलवे स्टेशनों के बीच रेल परिचालन अगली सूचना तक स्थगित कर दिया है। रेलवे के अनुसार धेमाजी तथा आसपास के क्षेत्रों में 110 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। भारी वर्षा के कारण रेलवे पुल संख्या 408/11-13 के समीप नदी के किनारे का बड़ा हिस्सा कटकर बह गया, जिससे पुल का एक पिलर अस्थिर हो गया है। वर्ष 1965 में निर्मित तथा बाद में ब्रॉडगेज में परिवर्तित इस पुल को सुरक्षा की दृष्टि से एहतियातन बंद किया गया है। रेलवे ने स्पष्ट किया कि इस घटना में किसी ट्रेन को कोई क्षति नहीं पहुंची है तथा किसी यात्री या रेलकर्मी के घायल होने की सूचना नहीं है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार तिनसुकिया मंडल के अंतर्गत मुरकोंगसेलेक और सिलापाथर के बीच रेल सेवाएं फिलहाल निलंबित रहेंगी तथा ट्रेनों का संचालन केवल सिलापाथर तक ही किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए मुरकोंगसेलेक से सिलापाथर तक विशेष बस सेवा शुरू की जा रही है। धेमाजी, सिलापाथर और मुरकोंगसेलेक रेलवे स्टेशनों पर हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं। रेलवे ने कहा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाकर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा पुल और रेलवे ट्रैक की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही रेल सेवाएं पुनः बहाल की जाएंगी।

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