गुवाहाटी, आचार्य महाश्रमण के सुशिष्य मुनि आनंद कुमार एवं मुनि विकास कुमार के अपनी सांसारिक पक्षीय भतीजी भारती देवी नौलखा के गुवाहाटी स्थित निवास पर आगमन से वर्षों पुरानी आध्यात्मिक अभिलाषा पूर्ण हुई। परिवार एवं श्रद्धालुओं ने उनका श्रद्धा, भक्ति और आत्मीयता के साथ स्वागत किया।
इस अवसर पर भारती देवी नौलखा ने भावुक होकर बताया कि उनके घर में पिछले 13 वर्षों से नमस्कार महामंत्र का सामूहिक जाप नहीं हुआ था। मुनिश्री के पावन सान्निध्य में पहली बार समाजजनों के साथ लगभग एक घंटे तक नमस्कार महामंत्र का सामूहिक जाप हुआ, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति से ओत-प्रोत हो गया।
कार्यक्रम में जुगराजजी, नवीन नौलखा, प्रणव, प्रिया, बाबूलाल नौलखा, मंजू देवी नौलखा सहित समस्त परिवार ने मुनिश्री का भावपूर्ण स्वागत किया।
भारती देवी नौलखा ने अपने बाल्यकाल की स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि राजस्थान के कालू में रहते हुए उन्हें साधु-साध्वियों की सेवा, दर्शन तथा कन्या मंडल की गतिविधियों में सक्रिय रहने का अवसर मिला। उन्होंने स्मरण किया कि शासनश्री मुनि जतनमल स्वामी के चातुर्मास के दौरान भी मुनि आनंद कुमार के सान्निध्य में सेवा-साधना का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।
उन्होंने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ एवं आचार्य परंपरा के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा है। यद्यपि उनका ससुराल स्थानकवासी परंपरा से जुड़ा है, फिर भी परिवार में सभी धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और सौहार्द का वातावरण है। वे नियमित रूप से भिक्षु स्वामी के मंत्रों का जाप करती हैं तथा अपने बच्चों को भी धार्मिक एवं नैतिक संस्कार प्रदान कर रही हैं।
दामाद नवीन नौलखा ने भी तेरापंथ धर्मसंघ के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त करते हुए मुनिश्री से आध्यात्मिक मार्गदर्शन का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुनिश्री के दर्शन एवं मंगल प्रवचन का लाभ लेने के लिए बड़ी संख्या में जैन एवं गैर-जैन श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।
परिवार की वरिष्ठ सदस्य ने भावुक होकर कहा कि वर्षों पहले उन्होंने विश्वास व्यक्त किया था कि एक दिन सभी बाधाएं दूर होंगी और चाचा महाराज उनके घर अवश्य पधारेंगे। आज वह संकल्प साकार हुआ और यह क्षण पूरे परिवार के लिए जीवनभर की अविस्मरणीय आध्यात्मिक स्मृति बन गया।








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