सोयल खेतान, रोहा
रोहा रुपहीतली के रुपम बरदलै गंभीर कमर रोग से पीड़ित, एक वर्ष से बिस्तर पर बिताने को विवश, आर्थिक तंगी के चलते नहीं कर पा रहे उच्च चिकित्सा।
मुख्यमंत्री और विधायक से की सहायता की अपील।
मनुष्य के जीवन में कब कैसी मुसीबत आ जाए, यह कोई नहीं जानता। ऐसी ही एक घटना रोहा के आर्थिक रूप से कमजोर रुपम बरदलै के साथ घटी है। एक तरफ शारीरिक अस्वस्थता, दूसरी ओर उच्च चिकित्सा के लिए रुपये-पैसों की चिंता, साथ ही घर की हालत भी काफी जर्जर है।
रोहा के रुपहीतली निवासी तथा दिन-दिहाड़ी कर जैसे-तैसे परिवार का लालन-पालन करने वाले रुपम बरदलै गत एक वर्ष से कमर के गंभीर रोग से पीड़ित होकर बिस्तर पर हैं। दो संतानों के पिता रुपम ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। वह दिन-दिहाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे, लेकिन पिछले एक वर्ष से कमर के गंभीर रोग से पीड़ित होने के कारण घर में खाने के भी लाले पड़ गए हैं। वहीं, रुपम की उच्च चिकित्सा के लिए पर्याप्त रुपये-पैसे नहीं हैं। इधर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और रहने के लिए भी उपयुक्त घर नहीं है। इन परिस्थितियों से रुपम बरदलै के परिवार पर विपदा का पहाड़ टूट पड़ा है।
इसीलिए रुपम की पत्नी ममी कोंवर और स्थानीय लोगों ने पत्रकारों के समक्ष रुपम तथा उनके परिवार की दुखभरी दास्तां सुनाते हुए असम सरकार, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा और रोहा के विधायक शशीकांत दास सहित अन्य महानुभावों से सहायता की अपील की है।
साथ ही रोहा खरागांव निवासी शिक्षक, कवि एवं समाजकर्मी लखी प्रसाद डेका रविवार को रुपम के घर पहुंचे और दाल, चावल, मीठा तेल, नमक तथा बिस्कुट देकर सहायता प्रदान की।
जदूमनी नाथ की आर्थिक स्थिति भी चिंताजनक
जदूमनी नाथ और उनकी पत्नी रेनू देवी दिन-दिहाड़ी कर जैसे-तैसे अपनी दो पुत्रियों सहित परिवार का लालन-पालन करते थे, लेकिन जदूमनी नाथ की वर्तमान स्थिति से परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई है। टूटी-फूटी जर्जर झोपड़ी में दो पुत्रियों के साथ यह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अत्यंत कष्टमय जीवन बिताने को विवश है। पैसों की कमी के कारण जदूमनी नाथ का उच्च उपचार भी नहीं हो पा रहा है।
इसीलिए उनकी पत्नी रेनू देवी ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा, विधायक शशीकांत दास सहित सभी से सहायता की अपील की है।









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