गुवाहाटी, प्रख्यात साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त जिला आयुक्त थानेश्वर मालाकार ने कहा कि सदाबहार गायक डॉ. भूपेन हजारिका के गीत केवल संगीत नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का गहन संदेश हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को उनके गीतों के अर्थ को सही ढंग से समझने का प्रयास करना चाहिए।
वे आज बजाली जिले के पाठशाला स्थित पाठशाला शिक्षापीठ आदर्श बुनियादी हाईस्कूल में डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित एक दिवसीय भूपेन संगीत कार्यशाला का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करते हुए संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का आयोजन पाठशाला शिक्षापीठ एवं भूपेन हजारिका सांस्कृतिक न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
अपने उद्घाटन संबोधन में मालाकार ने डॉ. भूपेन हजारिका के कई लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देते हुए उनके भावार्थ और सामाजिक संदेश को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि भूपेन हजारिका की रचनाएं आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रही हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय की ओर से उद्घाटनकर्ता थानेश्वर मालाकार सहित सभी अतिथियों एवं विषय-विशेषज्ञों का असमिया अस्मिता के प्रतीक फुलाम गामोछा, पौधा तथा विद्यालय की मुखपत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
सम्मानित अतिथियों में प्रसिद्ध संगीत निर्देशक नित्यानंद डेका, लोकप्रिय गायिका नमिता भट्टाचार्य गोस्वामी, भूपेन हजारिका सांस्कृतिक न्यास की सचिव मंजुला हजारिका, न्यासी एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ता गोपाल जालान, सदस्य हिमांशु पाठक, असमिया फिल्म निर्देशक झुलन कृष्ण महंत तथा वाद्य यंत्र कलाकार भाबीराम बोड़ो शामिल थे।
कार्यशाला में मंजुला हजारिका और गोपाल जालान ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन एवं स्वागत भाषण विद्यालय के प्रधानाचार्य उत्पल बरकाकटी ने किया।
इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार कल्याण कुमार कलिता, विद्यालय के उप-प्रधानाचार्य जगदीश चंद्र राय, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य नंद दुलाल चौधरी, शिक्षक गणेश कलिता सहित अनेक गणमान्य नागरिक, अभिभावक एवं 50 से अधिक प्रतिभागी उपस्थित रहे और कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता निभाई।








कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें