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लेखक, विचारक और समाजसेवी कपूर चंद जैन का निधन

 


गुवाहाटी, 9 अगस्त। प्रसिद्ध लेखक, विचारक और समाजसेवी कपूर चंद जैन का रविवार को अपराह्न 4 बजे आठगांव स्थित मारवाड़ी हॉस्पिटल में 84 वर्ष की आयु में हृदयाघात से निधन हो गया। उनके निधन का समाचार मिलते ही जैन समाज सहित उनके परिचितों और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई।


कपूर चंद जैन गुवाहाटी के प्रमुख सामाजिक व्यक्तित्वों में शामिल थे। वे बहुमुखी लेखक, चिंतक और समर्पित समाजसेवी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते थे। मारवाड़ी समाज के साथ-साथ जैन समाज के सामाजिक, धार्मिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय उपस्थिति रहती थी। अपनी ओजस्वी वाणी, विषय पर गहरी पकड़ और प्रभावशाली प्रस्तुति के कारण वे श्रोताओं पर अमिट छाप छोड़ते थे।


हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी, असमिया और बंगाली भाषाओं में वे दक्ष थे तथा संस्कृत और प्राकृत के भी विद्वान थे। वर्ष 1942 में पलासबाड़ी, असम में जन्मे जैन ने 1965 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में प्रथम श्रेणी में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इससे पूर्व उन्होंने कॉटन कॉलेजिएट हाई स्कूल से मैट्रिक तथा कॉटन कॉलेज से इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की। इंटरमीडिएट में असमिया विषय में उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए थे।


वर्ष 1969 में वे कामरूप चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव नियुक्त हुए। शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक योगदान देते हुए वे श्री दिगंबर जैन विद्यालय के महासचिव रहे। पी.एस. धनुका गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं।


जैन वर्तमान में लखनऊ से प्रकाशित अखिल भारतीय जैन महासभा के साप्ताहिक समाचार पत्र जैन गजट के मुख्य संपादक थे। वे असम साहित्य सभा से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे तथा ‘जातीय न्यास पूंजी’ समिति के संयोजक और केंद्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य रहे। वे ब्रह्मपुत्र साहित्य सभा के अध्यक्ष भी रह चुके थे।


धार्मिक एवं सामाजिक विषयों पर उन्होंने असमिया, हिंदी और अंग्रेजी में अनेक पुस्तकें एवं लेख लिखे। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए असम साहित्य सभा ने उन्हें प्रतिष्ठित वासुदेव जालान स्मृति साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। आचार्य विद्यासागर जी महाराज की कृति मूक माटी का उन्होंने असमिया भाषा में अनुवाद भी किया था।


उनका पार्थिव शरीर सोमवार सुबह 11 बजे केदार रोड स्थित उनके निवास से भूतनाथ के लिए रवाना किया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा। वे अपने पीछे धर्मपत्नी हीरामणि पाटनी, सुपुत्र राजेश, सुपौत्र अरिहन, तीन पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

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