गुवाहाटी। आध्यात्मिक साधना और गीता ज्ञान के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से महेश्वरी सभा, गुवाहाटी के अंतर्गत संचालित महेश योग सत्संग समिति द्वारा 2 अगस्त से 6 अगस्त तक माहेश्वरी भवन के द्वितीय तल पर पंचदिवसीय जीवनोपयोगी सत्संग समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
समिति के साधकों ने बताया कि यह सत्संग परम श्रद्धेय, तत्त्वज्ञ संत ब्रह्मलीन स्वामी रामसुखदास जी महाराज द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता पर रचित विश्वप्रसिद्ध टीका "साधक संजीवनी" पर केंद्रित है। स्वामी जी की वाणी जन-जन तक पहुंचे और लोग गीता के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतार सकें, इसी भावना से इस सत्संग का आयोजन किया गया है।
इस दिव्य सत्संग में श्रीधाम वृंदावन से पधारे परम पूज्य श्री हरि कृष्ण दास जी महाराज (चितरंजन दास जी महाराज) अपने मधुर एवं ज्ञानवर्धक प्रवचनों के माध्यम से साधकों को "साधक संजीवनी" के गूढ़ रहस्यों से अवगत करा रहे हैं।
महाराज श्री ने कथा के दूसरे दिन अपने सारगर्भित प्रवचन में कहा कि केवल बैठ जाने से सत्संग नहीं होता। यदि हम विधिवत बैठकर सुनना सीख जाएं, तभी सत्संग सफल होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केवल आटा गूंथने से रोटी नहीं बनती, उसे विधिवत बनाना भी आना चाहिए। जिनके मन में दृढ़ता नहीं होती, वे कितने भी बड़े शास्त्री बन जाएं, उनका ज्ञान सफल नहीं होता। प्रमादवश किया गया कार्य सफल नहीं होता। आलस्य और प्रमाद साधक के जीवन को बर्बाद कर देते हैं। उन्होंने कहा कि "प्रमाद ही मृत्यु है और आलस्य ही शत्रु है।" इसलिए प्रमाद और आलस्य का त्याग कर एकाग्रचित्त होकर कथा का श्रवण करना चाहिए।









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