गुवाहाटी, असम ने पशु जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने बताया कि असम की स्वदेशी लखीमी नस्ल की दुनिया की पहली IVF से जन्मी मादा बछिया का जन्म असम वेटरिनरी एंड फिशरी यूनिवर्सिटी, खानापारा में हुआ है।
यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की IVF लैब में हासिल की गई, जिसे राष्ट्रीय गोकुल मिशन के सहयोग से स्थापित किया गया है। IVF तकनीक का इस्तेमाल लखीमी नस्ल के संरक्षण और बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं के विकास के लिए किया जा रहा है।
डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने इस उपलब्धि को असम की “सभ्यता, संस्कृति और सृजन” का ऐतिहासिक संगम बताते हुए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता स्वदेशी नस्लों के संरक्षण, पशु स्वास्थ्य, दूध उत्पादन और भविष्य में डेयरी किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नए अवसर खोल सकती है।
लखीमी नस्ल असम की पंजीकृत स्वदेशी मवेशी नस्ल है। इस उपलब्धि को आधुनिक प्रजनन तकनीक के जरिए असम की पारंपरिक पशु आनुवंशिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।










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