जयपुर, राजस्थान की समृद्ध कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के कारीगरों, शिल्पकारों और किसानों के योगदान को रेखांकित किया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में राजस्थान के 24 प्रसिद्ध उत्पादों को GI टैग से सुसज्जित बताते हुए इन्हें प्रदेश की समृद्ध विरासत और स्थानीय कारीगरों के समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री की ओर से साझा संदेश में कहा गया कि बगरू व सांगानेरी प्रिंट, ब्लू पॉटरी, बीकानेरी भुजिया, जोधपुरी बंधेज, थेवा कला और सोजत की मेहंदी जैसी प्रसिद्ध परंपराएं आज वैश्विक स्तर पर राजस्थान का नाम रोशन कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक कारीगर, शिल्पकार और किसान को संबल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर जोर
राजस्थान सरकार की ‘एक ब्लॉक एक उत्पाद’ (One Block One Product) पहल भी स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित है। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (Rajeevika) के अनुसार, इस पहल के तहत प्रदेश के 150 ब्लॉकों में स्थानीय उत्पादों की पहचान कर उनकी वैल्यू चेन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत करने की योजना है।
इस पहल का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भर माइक्रो-एंटरप्राइज विकसित करना है। इसमें स्वयं सहायता समूहों (SHGs), ग्रामीण उद्यमियों और स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, बाजार से जोड़ने और ई-कॉमर्स जैसे माध्यमों से सहायता देने पर जोर दिया गया है।
GI टैग से क्या मिलता है फायदा?
Geographical Indication यानी GI टैग किसी ऐसे उत्पाद को भौगोलिक पहचान देता है जिसकी विशेष गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशिष्टता किसी खास क्षेत्र से जुड़ी होती है। इससे स्थानीय उत्पादों की पहचान और ब्रांड वैल्यू मजबूत करने में मदद मिलती है।
राजस्थान की औद्योगिक नीति RIPS 2024 में भी GI और ट्रेडमार्क पंजीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। नीति के तहत पात्र नई इकाइयों को GI, ट्रेडमार्क, पेटेंट और कॉपीराइट से जुड़ी लागत पर निर्धारित प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की गई है।
विरासत से रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक
राजस्थान सरकार के अनुसार, स्थानीय उत्पादों को केवल पारंपरिक विरासत के रूप में संरक्षित करना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं, कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करना भी महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
‘एक ब्लॉक एक उत्पाद’ परियोजना के तहत 150 ब्लॉकों में उत्पादों की वैल्यू चेन विकसित करने और लगभग 1.5 लाख स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, प्रसंस्करण और मार्केटिंग को बेहतर बनाने पर भी काम किया जाना है।
राजस्थान की पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की यह कोशिश ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।










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