घर केवल रहने की जगह नहीं है। दिन का बड़ा हिस्सा यहीं बीतता है और घर का वातावरण हमारे मन, दिनचर्या और काम करने के ढंग को प्रभावित करता है। वास्तुशास्त्र में भी घर की बनावट, दिशाओं, प्रकाश, वायु और वस्तुओं की स्थिति को विशेष महत्व दिया गया है। अच्छी बात यह है कि इसके लिए हमेशा बड़े निर्माण या तोड़फोड़ की आवश्यकता नहीं होती। कुछ छोटे बदलाव भी घर को अधिक खुला, स्वच्छ और संतुलित बना सकते हैं।
1. घर में प्राकृतिक प्रकाश और हवा आने दें
सबसे पहले खिड़कियों को केवल सजावट का हिस्सा न मानें। उन्हें नियमित रूप से खोलें ताकि घर में पर्याप्त हवा और प्राकृतिक प्रकाश आ सके। यदि किसी कमरे में केवल एक खिड़की है, तो हवा के बाहर निकलने के लिए निकास पंखे की व्यवस्था उपयोगी मानी गई है। वास्तु सामग्री में भी उचित वायु-संचार और प्रकाश को महत्वपूर्ण बताया गया है।
2. घर के मध्य भाग को खुला रखें
घर के मध्य भाग को ब्रह्मस्थान कहा जाता है। इसे भारी सामान, खंभे, सीढ़ी, शौचालय या अनावश्यक वस्तुओं से भरने के बजाय यथासंभव खुला और साफ रखें। दस्तावेज़ों में इसे घर की ऊर्जा के वितरण से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान बताया गया है।
3. मर्मस्थानों पर भार न रखें
वास्तु में कुछ संवेदनशील स्थानों को मर्मस्थान कहा गया है। इन स्थानों पर भारी सामान, बिस्तर, सीढ़ी, खंभा या अन्य स्थायी भार रखने से बचने की सलाह दी गई है। इसलिए घर की योजना बनाते समय केवल जगह बचाने के लिए हर खाली स्थान को सामान से न भरें।
4. दक्षिण-पूर्व कोना साफ और व्यवस्थित रखें
दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्नि से संबंधित माना गया है। इसलिए इस भाग में गंदगी, कचरा, जूठे बर्तन या अनावश्यक सामान जमा न होने दें। रसोई होने पर भी इस स्थान को स्वच्छ और सुव्यवस्थित रखना विशेष रूप से बताया गया है।
5. सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा में रखें
शयनकक्ष में बिस्तर की दिशा पर विशेष ध्यान दें। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखने की सलाह दी गई है। साथ ही बिस्तर के नीचे सामान भरकर रखने से बचें और कमरे में हवा का उचित आवागमन बनाए रखें।
6. बिस्तर के सामने दर्पण न रखें
शयनकक्ष में दर्पण उत्तर या पूर्व की दीवार पर रखने की सलाह दी गई है, लेकिन उसे सीधे बिस्तर के सामने रखने से बचने को कहा गया है। यह छोटा-सा बदलाव कमरे को अधिक शांत और व्यवस्थित अनुभव देने में सहायक हो सकता है।
7. रसोई में अग्नि और जल को अलग रखें
रसोई में चूल्हे के आसपास पर्याप्त हवा और प्रकाश होना चाहिए। चूल्हे को खिड़की के पास रखने तथा अग्नि वाले स्थान पर पानी न रखने की सलाह दी गई है। रसोई और शौचालय की दीवार भी एक ही दीवार पर न रखने का निर्देश दिया गया है।
शुरुआत बड़े बदलाव से नहीं, इनसे करें। वास्तु को केवल निर्माण के समय की व्यवस्था मानने के बजाय अपने वर्तमान घर की व्यवस्था को सुधारने के एक तरीके के रूप में भी देखा जा सकता है। घर में हवा और रोशनी बढ़ाना, बीच का स्थान खाली रखना, दक्षिण-पूर्व कोना स्वच्छ रखना, बिस्तर और दर्पण की स्थिति सुधारना तथा मुख्य द्वार और शयनकक्ष को व्यवस्थित रखना—ये ऐसे बदलाव हैं जिन्हें बिना बड़े खर्च के शुरू किया जा सकता है।
क्योंकि एक अच्छा घर केवल सुंदर दिखाई नहीं देता; वह ऐसा वातावरण भी बनाता है जिसमें रहना सहज, शांत और व्यवस्थित महसूस हो।
रिपोर्ट: देवकी नंदन देवड़ा
मो. 9377607101









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