दशलक्षण महापर्व पर तपस्वी तृप्ति जैन के सम्मान में निकला भव्य नगर भ्रमण - Rise Plus

NEWS

Rise Plus

असम का सबसे सक्रिय हिंदी डिजिटल मीडिया


Post Top Ad

दशलक्षण महापर्व पर तपस्वी तृप्ति जैन के सम्मान में निकला भव्य नगर भ्रमण



महज 16 वर्ष की आयु में दस दिनों की कठिन तपस्या कर तृप्ति जैन ने पेश की धर्म और आत्मसंयम की मिसाल


सेंकी अग्रवाल


गोरेश्वर। जैन धर्म के पावन दशलक्षण महापर्व के समापन अवसर पर गोरेश्वर जैन समाज की ओर से शुक्रवार को श्रद्धा एवं उत्साह के साथ विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर दस दिनों तक कठिन व्रत एवं तपस्या करने वाली 16 वर्षीय तृप्ति जैन के सम्मान में भव्य नगर भ्रमण निकाला गया। इस अवसर पर समाजबंधुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।


महज 16 वर्ष की आयु में दस दिनों तक तपस्या कर तृप्ति जैन ने धर्म के प्रति अपनी आस्था, दृढ़ संकल्प और आत्मसंयम का परिचय दिया। उनकी इस साधना की समाज के लोगों ने अनुमोदना की और इसे युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताया।


उल्लेखनीय है कि 16 सितंबर से शुरू हुए दशलक्षण महापर्व के दौरान गोरेश्वर स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे थे। श्रद्धालुओं ने नियमित रूप से भगवान की पूजा-अर्चना, कलश अभिषेक, आरती एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। दस दिनों तक मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।


अनंत चतुर्दशी पर विशेष पूजा-अर्चना


महापर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी के अवसर पर श्री दिगंबर जैन मंदिर में विशेष कलश अभिषेक एवं पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान की आराधना कर सुख, शांति, समृद्धि एवं विश्व कल्याण की मंगलकामना की।


धार्मिक अनुष्ठानों के बाद तपस्वी तृप्ति जैन के सम्मान में मंदिर परिसर से नगर भ्रमण कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। नगर भ्रमण के दौरान समाजसेवी एवं पत्रकार विजय अग्रवाल ने तृप्ति जैन का फूलाम गामोचा पहनाकर अभिनंदन किया।


नगर भ्रमण का उद्देश्य तृप्ति जैन की कठिन साधना की अनुमोदना करने के साथ समाज में धर्म, तप, त्याग और आत्मसंयम के प्रति जागरूकता का संदेश देना था।


दशलक्षण महापर्व में आत्मशुद्धि और संयम का संदेश


जैन धर्म में दशलक्षण महापर्व का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व आत्मशुद्धि, तपस्या, त्याग, संयम और क्षमा की भावना को जीवन में उतारने का संदेश देता है। इस दौरान श्रद्धालु उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य एवं ब्रह्मचर्य जैसे दस धर्मों की आराधना करते हैं।


तपस्वी तृप्ति जैन की दस दिवसीय साधना इस अवसर पर विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कम उम्र में कठिन व्रत का संकल्प लेकर उन्होंने अपनी धार्मिक निष्ठा और आत्मसंयम का परिचय दिया। समाज के लोगों ने उनकी तपस्या की अनुमोदना करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।


जैन समाज में तपस्वियों का अभिनंदन केवल व्यक्तिगत सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि तप, त्याग, संयम और आध्यात्मिक साधना के प्रति सामूहिक श्रद्धा की अभिव्यक्ति माना जाता है। इसी भावना के साथ आयोजित नगर भ्रमण में समाज के लोगों ने तृप्ति जैन की साधना के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।


दशलक्षण महापर्व के समापन पर आयोजित इस कार्यक्रम में गोरेश्वर जैन समाज की धार्मिक आस्था, एकता और सामाजिक सहभागिता की झलक देखने को मिली। वहीं तृप्ति जैन की दस दिवसीय तपस्या ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नियमित रूप से WhatsApp पर हमारी खबर प्राप्त करने के लिए दिए गए 'SUBSCRIBE' बटन पर क्लिक करें