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ऐतिहासिक श्री पांडु नाथ देवलय में 14 सितंबर को मनाया जाएगा 33वां गणेश चतुर्थी महोत्सव

 


गुवाहाटी: श्री पांडु नाथ देवलय गणेश मंदिर समिति की एक आम सभा की बैठक आज मंदिर परिसर में आयोजित की गई। बैठक में 33वें गणेश बाबा चतुर्थी महोत्सव के आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। यह महोत्सव 14 सितंबर 2026 को श्री पांडु नाथ देवलय, पांडु पोर्ट रोड में श्रद्धा एवं भव्यता के साथ मनाया जाएगा।


बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष श्री अजय पोद्दार ने की। बैठक में सचिव श्री रवि कुंडलिया, कोषाध्यक्ष श्री कमल सिंह गोलछा,

 उपाध्यक्ष संजय अग्रवाल,

पूर्व अध्यक्ष श्री पदम सेठिया, संयुक्त सचिव श्री प्रभु पोद्दार, कानूनी सलाहकार श्रीमती निशा पोद्दार तथा मुख्य सलाहकार श्री निमाई चंद्र दास, , मनीष अग्रवाल, किशन लाल सिंघी सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।


समिति ने गणेश चतुर्थी महोत्सव को श्रद्धा, उत्साह एवं भव्यता के साथ मनाने का निर्णय लिया है। पूजा एवं अर्चना प्रातः 8:30 बजे प्रारंभ होगी तथा प्रातः 11:00 बजे महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर भगवान श्री गणेश को विशेष रूप से तैयार किया गया 5 किलो का लड्डू केक अर्पित किया जाएगा।


दोपहर 12:00 बजे से महाप्रसाद का वितरण प्रारंभ होगा। समिति द्वारा 2,500 से अधिक श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की जा रही है।


महोत्सव की तैयारियों के तहत समिति द्वारा मंदिर परिसर के संपूर्ण रंग-रोगन एवं व्यापक साफ-सफाई का कार्य भी कराया जा रहा है। इसके साथ ही विद्युत केबल, लाइटों एवं स्विचों की आवश्यक मरम्मत एवं सुधार का कार्य भी महोत्सव से पूर्व पूरा किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं के लिए बेहतर एवं सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।


समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि महोत्सव में आयोजन से जुड़े समिति के सदस्य एक समान/समान प्रकार की वेशभूषा में उपस्थित रहेंगे, जिससे समिति की एकता, अनुशासन एवं सामूहिक भावना प्रदर्शित हो।


प्राचीन ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व


श्री पांडु नाथ देवलय, गुवाहाटी में पवित्र एवं विशाल ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित, प्राचीन एवं ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र स्थल का संबंध पांडव काल से माना जाता है।


मान्यता है कि अपने वनवास के दौरान पांडव इस पवित्र स्थान पर आए थे। उन्होंने यहां भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना की, पवित्र नदी में स्नान किया तथा भगवान विष्णु की पूजा एवं यज्ञ किया। इसके पश्चात वे नीलाचल पर्वत स्थित मां कामाख्या के दर्शन के लिए आगे बढ़े।


मंदिर परिसर की एक विशेष विशेषता यहां चट्टानों पर उकेरी गई भगवान गणेश की छह प्रतिमाएं हैं। मुख्य गणेश मंदिर के नीचे एक प्राचीन शिव मंदिर भी स्थित है, जिसका प्रवेश द्वार गुफानुमा मार्ग से होकर जाता है। इसके अलावा परिसर में एक प्राचीन भगवान विष्णु मंदिर भी है, जिसे स्थानीय परंपरा में पांडव काल से जुड़ा हुआ माना जाता है।


समिति ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल गणेश चतुर्थी का आयोजन करना ही नहीं, बल्कि श्री पांडु नाथ देवलय की समृद्ध आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण, रखरखाव एवं प्रचार-प्रसार करना भी है।


समिति ने सभी श्रद्धालुओं, शुभचिंतकों एवं आम नागरिकों से 14 सितंबर को आयोजित होने वाले 33वें गणेश बाबा चतुर्थी महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर भगवान श्री गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है।


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