अगस्त 2026 में 2,23,902 लेनदेन और ₹34.56 करोड़ का कारोबार, ग्रामीण बैंकिंग और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल
गुवाहाटी। महिला सशक्तिकरण से समाज के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में असम ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डिजीपे सखियों के जरिए डिजिटल लेनदेन में राज्य ने अगस्त 2026 में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। यह केवल एक बार की सफलता नहीं है, बल्कि राज्य की निरंतर प्रगति और मजबूत डिजिटल व्यवस्था का प्रमाण है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में असम में कुल 2,23,902 लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि ₹34.56 करोड़ रही। इस प्रदर्शन के आधार पर असम देश के सभी राज्यों में शीर्ष पर रहा।
डिजीपे सखियां स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी प्रशिक्षित महिलाएं हैं। ये ग्रामीण परिवारों को उनके घर के निकट बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। आधार आधारित भुगतान प्रणाली के जरिए छोटे बैंकिंग लेनदेन, पेंशन वितरण और सरकारी योजनाओं की राशि लाभार्थियों तक पहुंचाने का काम ये महिलाएं करती हैं। इससे ग्रामीणों को शहर या बैंक शाखा तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। सेवाएं सुलभ, सुरक्षित और समावेशी बनती हैं।
यह सफलता सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है। इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। डिजिटल भुगतान बढ़ने से पारदर्शिता आती है, बिचौलियों की भूमिका घटती है और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचता है। साथ ही, डिजीपे सखी बनने से महिलाओं को आजीविका का नया जरिया मिला है। वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और समाज में निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ रही है।
असम पहले भी डिजीपे सखी लेनदेन में देश में शीर्ष पर रहा है। फरवरी 2025 में राज्य ने 29.06 करोड़ रुपये के लेनदेन के साथ पहला स्थान हासिल किया था (स्रोत: असम सरकार, ग्रामीण विकास विभाग की मई 2025 न्यूज़लेटर)। अगस्त 2024 में भी असम को सर्वश्रेष्ठ डिजीपे सखी राज्य का खिताब मिला था। वर्तमान में राज्य में 2,781 डिजीपे सखी और 525 बीसी सखी सक्रिय हैं (स्रोत: असम सरकार, ग्रामीण विकास विभाग की न्यूज़लेटर)। यह लगातार प्रदर्शन दिखाता है कि राज्य में डिजिटल वित्तीय सेवाओं की पकड़ मजबूत हो रही है।
असम का यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा है। यह साबित करता है कि तकनीक और महिला सशक्तिकरण को साथ लाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदला जा सकता है। डिजिटल इंडिया का सपना तभी साकार होगा जब हर गांव तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचें और महिलाएं आर्थिक निर्णयों में भागीदार बनें। असम की नारी शक्ति ने यह कर दिखाया है। अब सवाल यह है कि क्या अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाकर डिजिटल वित्तीय समावेशन को नई ऊंचाई दे पाएंगे?









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