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तामुलपुर में हाथी-मानव संघर्ष की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन ने उठाए कदम

 


हेल्पलाइन नंबर जारी, लोगों से सतर्क रहने और हाथियों के आवागमन मार्गों को सुरक्षित रखने की अपील


सेंकी अग्रवाल, गोरेश्वर


तामुलपुर जिले में हाथी-मानव संघर्ष की रोकथाम के साथ-साथ लोगों और जंगली हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तामुलपुर जिला प्रशासन ने व्यापक जन-जागरूकता संदेश जारी किया है। ‘सुरक्षित तामुलपुर के लिए आइए, सह-अस्तित्व बनाएं’ शीर्षक से जारी संदेश के माध्यम से हाथियों के आवास और आवागमन कॉरिडोर को सुरक्षित रखने, बिजली से जुड़े खतरों से बचाव तथा संघर्ष की संभावना कम करने के लिए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।


जिला प्रशासन ने सलाह दी है कि जंगल या हाथियों के आवागमन कॉरिडोर में शिकार, लकड़ी संग्रह, मवेशी चराने आदि कार्यों के लिए प्रवेश न करें। किसी भी रूप में हाथियों को उकसाने, भगाने या परेशान करने से भी बचने की अपील की गई है। विशेष रूप से रात, देर रात और शाम के समय हाथियों के आवागमन वाले इलाकों में अकेले न जाने, सतर्क रहने तथा संभव हो तो समूह में आवागमन करने की सलाह दी गई है।


प्रशासन ने हाथियों की तस्वीर या वीडियो बनाने के लिए उनके नजदीक जाने से भी चेतावनी दी है। हाथी की मौजूदगी के दौरान आग, रोशनी या शोर के इस्तेमाल में सावधानी बरतने तथा पटाखे, तेज संगीत या अन्य किसी तरीके से हाथियों को डराकर भगाने की कोशिश न करने की सलाह दी गई है।


इसके साथ ही हाथियों के आवागमन वाले इलाकों में बिजली के तार, खंभे, ट्रांसफॉर्मर और अन्य संभावित बिजली खतरों की पहचान कर आपातकालीन सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए संबंधित अधिकारियों से आह्वान किया गया है। कुमारीकाटा रेंज में अधिक सक्रिय और वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली विकसित करने के साथ ही हाथियों के आवागमन मार्गों पर खतरनाक बिजली कनेक्शनों की नियमित जांच पर भी जोर दिया गया है।


जिला प्रशासन ने हाथियों के आवागमन वाले इलाकों में अवैध बिजली की बाड़, खुले बिजली के तार या खतरनाक बिजली कनेक्शन लगाने अथवा इस्तेमाल करने के प्रति कड़ी चेतावनी दी है। ऐसे उपाय जंगली हाथियों के साथ-साथ इंसानी जीवन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं और ऐसी गतिविधियां कानून के अनुसार दंडनीय हैं।


किसी हाथी को घायल या मृत अवस्था में पाए जाने पर लोगों को मृत हाथी के पास भीड़ न लगाने, शव को न छूने तथा कोई संदिग्ध जानकारी मिलने पर स्वयं जांच न करने की सलाह दी गई है। ऐसी स्थिति में वन विभाग या जिला प्रशासन को तत्काल सूचित करने का आग्रह किया गया है। मृत हाथी के मामले में पोस्टमार्टम परीक्षण, फोरेंसिक नमूना संग्रह और मौत के कारण की पारदर्शी रिपोर्ट सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों से भी आह्वान किया गया है।


स्थानीय लोगों को जंगली हाथियों के आवागमन के तरीके, संभावित बिजली के खतरों और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था के बारे में अधिक जागरूक बनाने पर भी जोर दिया गया है। हाथी दिखाई देने या उसकी मौजूदगी का कोई संकेत मिलने पर तुरंत जिला प्रशासन या वन विभाग को सूचित करने की अपील की गई है।


जिला प्रशासन ने कहा कि जनता की सतर्कता, समय पर जानकारी देना और संबंधित विभागों के समन्वित प्रयास हाथी-मानव संघर्ष से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने तथा मनुष्य और जंगली हाथियों दोनों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेंगे। साथ ही हाथियों के आवास, जंगल और हाथी कॉरिडोर के संरक्षण में जनता के सक्रिय सहयोग की कामना की गई है।


आपात सहायता के लिए तामुलपुर जिला प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर 93878 93394 पर संपर्क किया जा सकता है। यह जानकारी सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी विजय बेजबरुआ द्वारा मीडिया को प्रदान की गई।

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