नई पीढ़ी को समझने के लिए उपदेश नहीं, तर्कपूर्ण और मित्रवत संवाद जरूरी
गुवाहाटी। मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय में शुक्रवार शाम ‘जेनरेशन एक्स से जेनरेशन अल्फा तक’ विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। पुस्तकालय अध्यक्ष विनोद रिंगानिया की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का संयोजन सौरभ बोथरा ने किया।
कार्यक्रम में जानी-मानी साहित्यकार सुधा श्रीवास्तव, सचिव कांता अग्रवाल, लक्ष्मीपत बैद, प्रमोद तिवाड़ी, सुरेंद्र सिंह, रिश्ता केडिया, सरोज जालान, अंशु सारडा, राजेश मोर, अमित कुमार कंसल, जाकिर हुसैन, रतन अग्रवाला, किशोर कुमार जैन एवं रश्मि कंकानी सहित अन्य वक्ताओं ने विभिन्न पीढ़ियों के बीच बदलते संबंधों, सोच और संवाद की वर्तमान स्थिति पर विचार साझा किए।
वक्ताओं ने विशेष रूप से जेनरेशन एक्स और जेनरेशन अल्फा के बीच संवाद, संभावनाओं, चुनौतियों तथा आपसी सामंजस्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। चर्चा में कहा गया कि जेनरेशन अल्फा तकनीक के साथ बड़ी हो रही ऐसी पीढ़ी है, जो किसी बात को केवल परंपरा या अनुभव के आधार पर स्वीकार करने के बजाय उसके पीछे का कारण और तर्क समझना चाहती है।
वक्ताओं के अनुसार, नई पीढ़ी तक अपनी बात पहुंचाने के लिए केवल उपदेश देना या अपने अनुभवों का हवाला देना पर्याप्त नहीं है। उसकी सोच, परिवेश और संवाद के तरीकों को समझते हुए तर्कपूर्ण बातचीत स्थापित करना जरूरी है। नई पीढ़ी की दुनिया को समझकर उसी के अनुरूप संवाद के माध्यम तलाशने पर ही विचारों का प्रभावी आदान-प्रदान संभव है।
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पीढ़ियों के बीच दूरी कम करने का माध्यम दबाव या जबरदस्ती नहीं, बल्कि मित्रवत संवाद, आपसी समझ और विश्वास होना चाहिए। नई पीढ़ी के प्रश्नों को सुनना, उनके विचारों का सम्मान करना और खुले मन से संवाद करना पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान पीढ़ियों के बदलते दृष्टिकोण के साथ संवाद की शैली में बदलाव की आवश्यकता पर भी विचार किया गया। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक और सामाजिक परिवेश में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच अलग-अलग पीढ़ियों के अनुभव और दृष्टिकोण एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं, बशर्ते संवाद के लिए खुला और सम्मानजनक वातावरण तैयार किया जाए।
कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न पीढ़ियों के बीच बढ़ती संवादहीनता को समझना तथा आपसी समझ और सामंजस्य के लिए व्यावहारिक रास्तों पर चर्चा करना रहा। संवाद कार्यक्रम ने उपस्थित लोगों को पीढ़ियों के बदलते संबंधों और संवाद की आवश्यकता पर विचार करने का अवसर प्रदान किया।









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