टियोक के बिहानी परिवार की पहल, दिल्ली की सुप्रसिद्ध भजन गायिका निकुंज कामरा ने दी विशेष प्रस्तुति
टियोक से बिजू तुनवाल।
राधा अष्टमी के पावन अवसर पर टियोक के बिहानी परिवार की पहल पर जोरहाट में पहली बार विराट स्तर पर भक्ति, संगीत एवं संकीर्तन से जुड़ी भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। जोरहाट स्थित माहेश्वरी भवन के पांचवें माले पर स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में राधा नाम संकीर्तन और श्री राधा-कृष्ण की भक्ति से पूरा वातावरण राधामय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्ति संगीत में झूमते और नृत्य करते नजर आए।
यह विशेष आयोजन टियोक स्थित श्री हार्डवेयर के संचालक राजगोपाल बिहानी एवं उनकी पत्नी संपत देवी बिहानी की ओर से किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण दिल्ली की सुप्रसिद्ध भजन एवं भक्तिमय गायिका निकुंज कामरा की विशेष प्रस्तुति रही। जोरहाट में यह उनकी पहली प्रस्तुति थी। उन्होंने अपनी मधुर आवाज और भावपूर्ण भजनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
संध्या आरती के बाद शुरू हुआ रसमय संकीर्तन
कार्यक्रम का शुभारंभ शाम 6:30 बजे संध्या आरती से हुआ। इसके बाद शाम 7:30 बजे भजन संध्या एवं रसमय संकीर्तन का शुभारंभ हुआ। निकुंज कामरा ने ‘जय राधे रानी’, ‘बांके बिहारी’ और ‘कृष्ण कन्हैया’ की भक्ति से जुड़े भजनों की प्रस्तुति से कार्यक्रम को भक्तिमय बना दिया।
उनके भजनों की शुरुआत होते ही श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमने लगे। भजन संध्या के दौरान राधा-कृष्ण की मनोहारी झांकी भी प्रस्तुत की गई, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का विशेष केंद्र रही। झांकी और भक्ति संगीत के संगम ने पूरे कार्यक्रम को आध्यात्मिक रंग प्रदान किया।
बांके बिहारी, राधा रानी एवं श्रीकृष्ण की महिमा पर आधारित भजनों पर श्रद्धालुओं ने तालियां बजाईं और भक्ति में झूमते हुए नृत्य किया। पूरा प्रेक्षागृह कई बार ‘राधे-राधे’ के जयघोष से गूंज उठा।
पारंपरिक तरीके से हुआ निकुंज कामरा का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान निकुंज कामरा का असम की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप स्वागत एवं सम्मान किया गया। शांति देवी बिहानी ने चादर ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया, जबकि राम सोमानी ने कीर्ति-चिह्न भेंट कर उन्हें सम्मानित किया।
निकुंज कामरा के साथ आए अन्य कलाकारों एवं सहयोगियों का भी राम अवतार बिहानी, मदन बिहारी सहित आयोजन से जुड़े सदस्यों ने स्वागत एवं अभिनंदन किया।
आयोजन की व्यवस्था में तुषार बिहानी की सक्रिय भूमिका
कार्यक्रम को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने में तुषार बिहानी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने आयोजन से जुड़ी तैयारियों और कार्यक्रम स्थल की विभिन्न व्यवस्थाओं में सक्रिय सहभागिता निभाई। आवश्यक प्रबंधों को समय पर पूरा कराने तथा कार्यक्रम के सुचारु संचालन में उनके प्रयासों का विशेष योगदान रहा।
सभी आयु वर्ग के श्रद्धालुओं ने लिया भाग
भजन संध्या में पुरुषों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित समाज के सभी आयु वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। टियोक के अलावा जोरहाट जिले एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में पहुंचे।
निकुंज कामरा की जोरहाट में पहली प्रस्तुति को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्ति संगीत के दौरान अनेक श्रद्धालु अपने स्थान पर बैठे-बैठे भजनों में लीन नजर आए, जबकि कई श्रद्धालु भक्ति में झूमते और नृत्य करते दिखाई दिए।
निकुंज कामरा का विशेष जुड़ाव श्री राधा-कृष्ण, श्री बांके बिहारी जी एवं राधा नाम संकीर्तन से रहा है। उन्होंने कम उम्र से ही भजन गायन की शुरुआत की और विभिन्न स्थानों पर भजन एवं सत्संग कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति से जोड़ती रही हैं।
भक्ति, संगीत और संस्कृति का सुंदर संगम
आयोजक राजगोपाल बिहानी एवं संपत देवी बिहानी ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य राधा रानी की भक्ति, नाम संकीर्तन और आध्यात्मिक भावना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। श्रद्धालुओं की बड़ी सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया।
राधा अष्टमी के अवसर पर आयोजित इस भव्य भजन संध्या में भक्ति, संगीत, संस्कृति और सामाजिक सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिला। निकुंज कामरा की मधुर आवाज में राधा रानी और बांके बिहारी के भजनों ने जोरहाट की शाम को भक्तिमय बना दिया और श्रद्धालु लंबे समय तक भक्ति रस में झूमते नजर आए।










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