हीरक जयंती समारोह में स्मारिका ‘डँरियली’ सहित नौ पुस्तकों का विमोचन, साइकिल रैली और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई रौनक
रिपोर्ट: बिजू तुनवाल, टियोक
टियोक। जोरहाट जिले के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित बाहना महाविद्यालय की 60 वर्षों की गौरवशाली यात्रा केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रही है, बल्कि समाज, संस्कृति, साहित्य और राजनीति के विभिन्न क्षेत्रों में भी इसका उल्लेखनीय योगदान रहा है। यह बात जगन्नाथ बरुआ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्योतिप्रसाद सैकिया ने बाहना महाविद्यालय के हीरक जयंती समारोह के दूसरे दिन आयोजित खुली सभा को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की छह दशकों की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में स्थित यह शिक्षण संस्थान शैक्षणिक विकास के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
आयोजन समिति के अध्यक्ष अनंत कुमार बरुआ की अध्यक्षता में आयोजित सभा में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चुम्बित चलिहा ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने महाविद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक की विकास यात्रा का विवरण प्रस्तुत करने के साथ भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित अखिल असम छात्र संघ (आसू) के अध्यक्ष उत्पल शर्मा ने कहा कि किसी महाविद्यालय की जयंती मनाना केवल उत्सव नहीं, बल्कि अतीत की उपलब्धियों और अनुभवों को याद करने का अवसर है। उन्होंने सुझाव दिया कि बाहना महाविद्यालय को पिछले 60 वर्षों के अनुभवों के आधार पर आगामी 50 वर्षों की विकास रूपरेखा तैयार करनी चाहिए।
उन्होंने महाविद्यालय को स्वतंत्र महाविद्यालय के रूप में विकसित करने की मांग के प्रति आसू का समर्थन व्यक्त किया। साथ ही, बाहना महाविद्यालय में वाणिज्य संकाय शुरू करने के लिए जोरहाट जिला छात्र संघ से सरकार के समक्ष मांग उठाने का आह्वान किया।
प्राध्यापक अजीत बोरा के संचालन में आयोजित सभा में टियोक के विधायक विकास सैकिया, असम औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद तपन कुमार गोगोई, महाविद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. मुनीन्द्र कुंवर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष कमलेश सिंह, सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. प्रसन्न कुमार दत्त, शकुंतला बरदलै, प्रीति बरदलै और डॉ. शान्तना सैकिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
डॉ. नमिता सैकिया द्वारा रचित सामूहिक गीत के साथ सभा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर हीरक जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।
स्मारिका ‘डँरियली’ सहित नौ पुस्तकों का विमोचन
हीरक जयंती के अवसर पर हेमेन कुमार सैकिया और डॉ. मधुस्मिता बरुआ चांगकाकती के संपादन में प्रकाशित स्मारिका ‘डँरियली’ का विमोचन माजुली सांस्कृतिक विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कुलपति प्रोफेसर डम्बरुधर नाथ ने किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ‘डँरियली’ केवल एक स्मारिका नहीं, बल्कि बाहना महाविद्यालय के 60 वर्षों के इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस अवसर पर दोनों संपादकों ने भी अपने विचार रखे।
महाविद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. मुनीन्द्र कुंवर की अध्यक्षता में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में स्मारिका के अलावा आठ अन्य पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया।
सहायक प्राध्यापक अजीत कुमार बोरा द्वारा संपादित ‘इतिहासे गरका बाहना महाविद्यालय’ का विमोचन डॉ. मुनीन्द्र कुंवर ने किया। इस पुस्तक के प्रकाशन का संपूर्ण खर्च सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. रफीक अहमद ने वहन किया।
डॉ. मृदुस्मिता बोरा द्वारा संपादित ‘डॉ. भूपेन हजारिका : सृष्टि और चेतना’ का विमोचन एनईआईएसटी के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक एवं रामायण साहित्य की शोधकर्ता डॉ. मालिनी ने किया।
डॉ. रीमा राभा, डॉ. सरला दास, डॉ. मृदुस्मिता बोरा और पॉलीप्रिया बूढ़ागोहाईं द्वारा संपादित ‘Women in Society’ का विमोचन जोरहाट इंजीनियरिंग कॉलेज की सेवानिवृत्त प्राध्यापिका डॉ. अदिति बेजबरुआ ने किया।
डॉ. दीपशिखा दिहिंगिया, डॉ. मुनमी बोरा, डॉ. पूजामणि बरुआ और डॉ. डिम्पल पाठक द्वारा संपादित ‘Anuraran’ का विमोचन अनंत कुमार बरुआ ने किया। अजीत कुमार बोरा की अनुवाद पुस्तक ‘नाकान्दिबा सोन’ का विमोचन डॉ. शान्तना सैकिया ने किया, जबकि ममी बोरा की पुस्तक ‘अरण्यर उचुपनि’ का विमोचन डॉ. नमिता सैकिया ने किया।
डॉ. सरला दास के कहानी-संग्रह का विमोचन डॉ. रफीक अहमद ने किया। डॉ. डामिनी कश्यप और पॉलीप्रिया बूढ़ागोहाईं द्वारा संपादित ‘बाहना कॉलेज न्यूज लेटर’ का विमोचन डॉ. प्रसन्न कुमार दत्त ने किया। वहीं, डॉ. चमी कलिता और सुप्रिया दत्ता द्वारा तैयार ‘बुलेटिन ऑफ वुमेन्स सेल’ का विमोचन डॉ. इंदिरा बरुआ ने किया। कार्यक्रम का संचालन अजीत बोरा और डॉ. मृदुस्मिता बोरा ने किया।
बाहना महाविद्यालय का योगदान उल्लेखनीय : केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्घेरिटा
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय राज्य मंत्री पवित्र मार्घेरिटा ने कहा कि जोरहाट के शैक्षणिक विकास में बाहना महाविद्यालय का योगदान उल्लेखनीय रहा है। इस संस्थान ने असम के सामाजिक जीवन को अनेक प्रतिभाशाली व्यक्तित्व दिए हैं, जिन्होंने प्रशासन, साहित्य, संस्कृति, राजनीति और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दिया है।
साइकिल रैली और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई समारोह की रौनक
हीरक जयंती समारोह के दूसरे दिन सुबह टियोक उप-जिले के आयुक्त मोगेन नरह ने साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में सौ से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया और लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय की।
रात में सेवानिवृत्त प्राचार्य राजेन्द्र नाथ दत्त की स्मृति में आयोजित सांस्कृतिक सम्मेलन का उद्घाटन प्रसिद्ध अभिनेत्री वर्षारानी बिषया ने किया। कार्यक्रम में लोकप्रिय गायक प्रवीण बोरा, बिकशिता गोगोई सहित कई कलाकारों ने नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मनोरंजन किया।
दो दिवसीय हीरक जयंती समारोह में एक हजार से अधिक विद्यार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। समारोह के दौरान महाविद्यालय की छह दशक लंबी शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक यात्रा की उपलब्धियों को याद किया गया।





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