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भेद विज्ञान का सेतु है अकिंचन्य धर्म - पंडित किरण प्रकाश


सुनील कुमार सेठी

गुवाहाटी - फैंसी बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व अत्यंत भक्ति भाव से मनाया जा रहा है। प्रतिदिन प्रातः काल से लेकर देर रात तक मंदिर में श्रद्धालुओं का ताता लगा रहता है। प्रतिदिन शांति धारा अभिषेक पूर्वक नित्य नियम की पूजा एवं दशलक्षण मंडल विधान, सोलह कारण मंडल विधान की पूजा किरण प्रकाश जी शास्त्री द्वारा संगीतकार अजीत जैन के सानिध्य में संपादित की जाती है। सांयकाल पंडित किरण प्रकाश जी का सारगर्भित प्रवचन सुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग आते हैं। अकिंचन्य धर्म की व्याख्या करते हुए किरण प्रकाश जी ने कहा कि एकमात्र आत्मा ही अपना है शेष सब पर पदार्थ है। वह मेरे नहीं है ऐसा मानना जानना और उसमें लीन होना ही उत्तम अकिंचन्य धर्म है। अकिंचन्य धर्म वेद विज्ञान का सेतु है। परिग्रह सबसे बड़ा पाप है और अकिंचन्य सबसे बड़ा धर्म। आज प्रातः शांति धारा करने का सौभाग्य अमरचंद रंजय कुमार अजमेरा एवं महावीर प्रसाद महेंद्र कुमार पाटनी को सपरिवार प्राप्त हुआ। इस अवसर पर पंचायत के अध्यक्ष महावीर जैन एवं मंत्री वीरेंद्र कुमार सरावगी ने समाज की ओर से पुण्य धारी परिवारों का धन्यवाद ज्ञापन किया। सांयकाल आरती संयोजक राम चंद्र सेठी एवं कुचामन से पधारे संगीतकार अजीत जैन ने अपना आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। यह जानकारी ओम प्रकाश सेठी व सुनील कुमार सेठी द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है।

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