अमीनगाँव से राजकुमार झांझरी
गुवाहाटी, 24 सितम्बर - माता-पिता के श्राद्ध के नाम पर पूजा-पाठ व अन्य धार्मिक आडम्बरों के बजाय गरीबों, बेसहारा लोगों की मदद करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करना है। यह कहना है पूर्वोत्तर को विकलांग मुक्त बनाने की मुहिम में जुटे विशिष्ट समाजसेवी गुवाहाटी निवासी शुभकरण बाफना का। पिता की पुण्यतिथि पर अमीनगाँव स्थित तोलाराम बाफना कृत्रिम पैर व केलिपर केंद्र में 15 विकलांगों को नि:शुल्क कृत्रिम जयपुरी पैर प्रत्यारोपित करने के साथ ही उन्हें भरपेट भोजन करवाकर पिता को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले शुभकरण बाफना ने अपने पिताजी की पुण्य स्मृति में अमीनगाँव में 28 मार्च 1991 को कृत्रिम जयपुरी पैर प्रत्यारापण केंद्र की स्थापना की थी, जिसके जरिये विगत 27 वर्षों में 8110 दिव्यांगों को नि:शुल्क कृत्रिम जयपुरी पैर प्रत्यारोपित किये जा चुके हैं। इनमें समस्त पूर्वांचल के अलावा नेपाल, भूटान, म्यांमार आदि देशों से भी दिव्यांग व्यक्ति कृत्रिम जयपुरी पैर प्रत्यारोपित कर हंसी-खुशी अपने घरों को लौट चुके हैं तथा अपना स्वाभाविक जीवन जी रहे हैं।
इस बार कृत्रिम पैर प्रत्यारोपित करवाने वालों में कामि नार्जारी (बाक्सा), प्रांजल मंडल (नगाँव), सुमित मंडल (बरपेटा), बादल अली (मोरीगाँव), दिम इस्लाम (मोरीगाँव), नारायण शर्मा (शोणितपुर), आमीर मियाँ (कुचबिहार), सैदुल इस्लाम (ग्वालपाड़ा), मरियम नेसा (बरपेटा), रहमत अली (ग्वालपाड़ा), अतुल कटकी (शोणितपुर), यमुना मेधी (बरपेटा), अभिजित गोस्वामी (गुवाहाटी) आदि प्रमुख थे।
इस अवसर पर उपस्थित पत्रकार व समाजसेवी दीपक शर्मा ने कहा कि शुभकरण बाफना की महानुभवता काफी आदरणीय व प्रशंसनीय है। वे असम के लिए जो महान कार्य कर रहे हैं, वह विश्ववासियों के लिए प्रेरणा दायक है। उन्हें राज्य सरकार व भारत सरकार द्वारा यथायोग्य सम्मान देना अपेक्षित है, ताकि न सिर्फ उन्हें अधिक समर्पित भाव से सेवा की प्रेरणा मिले, अपितु समाज के अन्य लोगों में भी समाज के कमजोर व उपेक्षित वर्ग की सेवा की भावना जागे।








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