उज्जैन से संपत मिश्र
उज्जैन (३ सितंबर) - उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर की इस वर्ष की आखिरी शाही सवारी पालकी के रूप में निकाली गई। नगर के सभी मुख्य मार्गो से भगवान महाकालेश्वर की पालकी भ्रमण करते हुए वापस महाकाल मंदिर में पहुंची। मान्यता के अनुसार महाकालेश्वर अपनी जनता का हाल चाल पूछने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इस समय सारा उज्जैन नगर शिवमय हो जाता है। लाखों की तादाद में श्रद्धालु महाकालेश्वर की शाही पालकी के दर्शन करने के लिए कई घंटों से रास्तों में इंतजार किए हुए खड़े रहते हैं। यह सवारी श्रावण महीने में हर सोमवार को निकलती है। इस वर्ष की यह अंतिम सवारी है। महाराष्ट्र गुजरात और उज्जैन क्षेत्र में चंद्र पंचांग के अनुसार सावन महीने की अमावस्या से भाद्रपद महीने की अमावस्या तक सावन का प्रभाव माना जाता है। भगवान महाकालेश्वर की शाही पाल की सवारी में शोभायात्रा के रूप में सैकड़ों झांकियां भाग लेती है। पुलिस प्रशासन सरकारी और गैरसरकारी सैकड़ों कार्यकर्ता शोभायात्रा को व्यवस्थित करने में लगे हुए रहते हैं। आज की शाही सवारी में अद्भुत नजारा देखने को मिला। शहर के सभी मुख्य मार्गों को वाहन वर्जित क्षेत्र घोषित करके जगह जगह रास्ते को बंद कर दिया गया था। ऐसे में एक एंबुलेंस के सायरन को सुनकर के पुलिस प्रशासन और कार्यकर्ताओं ने 5 मिनट के अंदर शोभा यात्रा को रोक कर तुरंत बेरीकेट को खोल करके एंबुलेंस को आगे बढ़ने दिया गया। महाकालेश्वर की शाही सवारी को देखने के लिए दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे हैं।
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