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प्रिजन मिनिस्ट्री इंडिया का 12वां राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन आज


गुवाहाटी, 23 अक्टूबर । प्रिजन मिनिस्ट्री इंडिया का 12वां राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजन बुधवार को रुकमणी नगर स्थिति कैथेड्रल चर्च के प्रक्षागार में होगा। जिसका उद्घाटन असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल करेंगे। यह जानकारी फादर सेबेस्टियन में आज गुवाहाटी प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता में संवाददाताओं को दी। फादर ने आगे कहा कि राष्ट्रीय स्तर की स्वयंसेवी संस्था प्रिजन मिनीस्टी इंडिया सजायाफ्ता कैदी एवं उनके परिवार व बच्चों के पुनर्वास के लिए कार्य करती है। जेल से रिहा होने के बाद कारा बंदी का भविष्य सुधारने के लिए भी यह उचित कदम उठाती है। इसकी स्थापना 1986 में हुई थी और 27 अप्रैल 2000 को कैथोलिक बिशप के राष्ट्रीय अधिवेशन में इसको पहचान प्राप्त हुई और इसके अंतर्गत यह संस्था काम करने लगी। आज इस संस्था में 6000 से ज्यादा स्वयंसेवक जुड़ गए हैं और पूरे भारत में 850 शाखाये काम कर ही है। पूर्वोत्तर में पहली बार इसका 12वां राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हो रहा है। इस संगोष्ठी में प्रिजन मिनिस्ट्री इंडिया के कई राष्ट्रीय पदाधिकारी भाग लेंगे एवं कई शिक्षाविद और सरकारी पदाधिकारियों से भी मत विनिमय किया जाएगा। इस अधिवेशन का मुख्य विषय आप अकेले नहीं है रखा गया है। इस संगोष्ठी से पहले यह संस्था राष्ट्र में 1401 जेल वासियों से संपर्क कर उनसे मत विनिमय कर चुकी है। इसके जरिए उन्हें संस्कारित करने की चेष्टा भी की जा रही है। यह संस्था 26 वर्षों से 1000 से भी ज्यादा कारा बंदियों का पुनर्वास करने में सक्षम हुई है। फादर ने आगे बताया कि कारा बंदी को भी आम नागरिक की तरह जीवन जीने का अधिकार है। कुछ करा बंदी धन के अभाव में अपनी पैरवी के लिए वकील कर पाने में सक्षम नहीं हो पाते हैं तथा कुछ करा बंदियों का चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण उन्हें अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ जाती है एवं कई करा बंदी अपनी सजा पूरी कर के बाहर निकलते ही कोई रोजगार का साधन न मिलने के कारण पुनःअपराध की दुनिया में चले जाते हैं। ऐसी परिस्थिति में मुख्य रूप से उनके लिए शिक्षा, नैतिक परामर्श, दक्षता और आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान करने का काम प्रिजन मिनिस्ट्री इंडिया करती है। जेल से रिहा होने के बाद शारीरिक, मानसिक व आर्थिक दृष्टि से वो संपन्न हो उसका भी ध्यान रखा जाता है ताकि वह फिर अपराध की दुनिया में न जा पाएं।

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