गुवाहाटी, 19 नवम्बर । तवांग का बंमुला क्षेत्र सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। पिछले युद्ध में चीन ने यहां बहुत नुकसान पहुंचाया था। हमारी बहुत बड़ी जमीन चीन ने अपने कब्जे में ले ली थी। ऐसे में हमारे भाई तवांग यात्रा कर वहां के लोगों को यह अहसास कराते हैं कि आप अकेले नहीं हो हम भी आपके साथ हैं। यह बातें असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने तेरापंथ भवन में भारत तिब्बत सहयोग मंच द्वारा आयोजित सातवीं तवांग यात्रा पर यात्रियों के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कहीं। राज्यपाल महोदय ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में इंद्रेश कुमार ने सिंधु दर्शन की तर्ज पर तवांग यात्रा शुरू की थी। इसी तर्ज पर अंडमान यात्रा भी शुरू हो चुकी है। तीनों का उद्देश्य एक ही है हमारी यह कोशिश रहेगी कि जिस तरह अंडमान में 30 दिसंबर 1946 को प्रथम भारतीय तिरंगा फहराने की याद में आज सरकारी कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं उसी तरह तवांग यात्रा पर भी सरकारी कार्यक्रम आयोजित होनी चाहिए। मैं व्यक्तिगत रूप से असम और अरुणाचल सरकार से यह अनुरोध करूंगा।
राज्यपाल महोदय ने केंद्र सरकार की पूर्वोत्तर के प्रति अपनाई गई नीतियों के बारे में बोलते हुए कहा कि जिस तरह वास्तु शास्त्र में उत्तर पूर्व कोना अति महत्वपूर्ण होता है उसी तरह भारत के नक्शे में भी उत्तर पूर्वी राज्य काफी महत्वपूर्ण है। मोदी जी ने पूर्वोत्तर को अधिक महत्व देकर कई योजनाएं शुरू की है ।पहले अरुणाचल में रेल नहीं चलती थी पर आज तीन रेल दिल्ली तक चल रही है। आसियान देश के बीच सड़क संपर्क भी शुरू होने जा रहा है। आसियान देश का मुख्यालय गुवाहाटी में ही बनने जा रहा है। बांग्लादेश, भूटान ने अपने कार्यालय भी गुवाहाटी में खोल लिए हैं। इसके चलते पूर्वोत्तर की आर्थिक नीति काफी आगे बढ़ जायेगी। वाराणसी से बांग्लादेश की चटगांव तक माल वाहक जहाज सेवा चल रही है जो ब्रह्मपुत्र नद से होकर गुजरती है। इसका प्रत्यक्ष लाभ पूर्वोत्तर को भी मिल रहा है। राज्यपाल महोदय ने यात्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि तवांग यात्रा का मिशन पूरा हो चुका है अब इसे आगे बढ़ाना आप लोगों का काम है। इससे पहले राज्यपाल महोदय ने मंच पर आसीन भारत तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्रेश कुमार का फुलाम गमछा से अभिनंदन कर प्रतीक चिन्ह भेंट किया। मंच पर विराजित महामंडलेश्वर यतींद्र नाथ का भी राज्यपाल महोदय ने असमिया परंपरा के अनुसार स्वागत किया। इस अवसर पर मंच पर राज्य की प्रथम महिला प्रेम मुखी, भारत तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हरजीत ग्रेवाल, महासचिव पंकज गोयल ,निर्वासित तिब्बत सरकार के वित्त मंत्री कर्मा जी उपस्थित थे। महासचिव गोयल ने स्वागत भाषण देते हुए कहा की तवांग की पहली यात्रा में 67 लोग थे जो आज बढ़कर 400 से भी अधिक संख्या को पार कर चुके हैं। पर सीमित व्यवस्था के चलते संख्या बढ़ाने में असमर्थ से हो रहे हैं। आज यहां सभी प्रांत के लोग इस यात्रा में शामिल है।एक सप्ताह की यात्रा को असम के राज्यपाल महोदय हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे ।यह यात्रा तवांग के बमूला क्षेत्र में पहुंचकर भूमि पूजन करेगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य यही है कि चीन अपनी दीवार की सीमा में वापस जाएं और हमारे कब्जे की जमीन हमें वापस कर दे। महामंडलेश्वर ने अपने वक्तव्य में कहा कि पहली यात्रा में 67 यात्री थे। जिनमें 30 अकेले तिब्बती थे ।मगर एक निश्चित सीमा के बाद तिब्बत के लोगों को आगे जाने की अनुमति नहीं थी। इससे तिब्बतियों के मन में एक दर्द का एहसास होता था और वे अपनी जन्म भूमि को प्रणाम कर रोने लगते थे। तवांग का बमूला क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है वहां राष्ट्रीय गीत का काफी सम्मान होता है।
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निर्वासित तिब्बत के वित्त मंत्री करमाजी ने अपने संबोधन में कहा कि तिब्बत भारत का संबंध बहुत पुराना है। प्राचीन काल में भी कई तिब्बत यात्री भारत भ्रमण कर चुके हैं ।मैंने कभी तिब्बत नहीं देखा। मेरा जन्म सिक्किम में हुआ है। हम अपनी जन्म भूमि से निर्वासित जीवन जी रहे हैं। इस समय भारत तिब्बत सहयोग मंच से हमें काफी बल मिला है। भारत के लोगों ने हमें सर आंखों पर बिठा कर रखा है। इंद्रेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा हम सब एक ही मालिक के घर से इस धरती पर आते हैं। यहां आकर हम अलग-अलग जाति और धर्म में बदल जाते हैं ।राम मंदिर मुद्दे पर बोलते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि अमृतसर का स्वर्ण मंदिर न कभी बदला था और ना कभी बदलेगा यही बात राम मंदिर पर भी लागू होती है। आज हालात इतने बदल गए हैं कि मुस्लिम भाई स्वयं कहते हैं कि राम रूपी खुदा का मंदिर तोड़ना धर्म नहीं है ।वह कहते हैं कसम खुदा की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे ।हिंदुस्तान किसी की जागीर नहीं है यहां सब समान है। इंद्रेश कुमार ने असम के राज्यपाल महोदय की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक प्रशासक के रूप में असम के राज्यपाल जगदीश मुखी की भूमिका काफी सराहनीय रही है। ये निष्पक्ष रहकर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं भारत की धर्मनिरपेक्षता पर बोलते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत सभी धर्मों का आदर करता है और विश्व के प्राय सभी धर्मों को अपनाता है। विश्व के अन्य देशों में अगर जैन धर्म या अन्य भारतीय धर्म को अपनाने के लिए कहा जाए तो वे नहीं अपनाते हैं ।मगर हम विश्व के किसी भी धर्म को सहज में ही अपना कर सम्मान देते हैं ।यह हमारी एक सही सोच है। चीन की नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम चीन से झगड़ा नहीं चाहते हैं इसीलिए भारत तिब्बत सहयोग मंच का गठन किया गया है ।चीन ने एक बार फिर अपनी गिद्व दृष्टि भारत पर डाली है ।भूटान का डोकलाम विवाद इसका ताजा उदाहरण है। भारत ने कूटनीतिक तरीके से डोकलाम विवाद को बिना युद्ध किए ही सुलझा लिया। इंद्रेश कुमार ने तवांग यात्रियों को यात्रा में रखने वाली विशेष सावधानियां एवं यात्राआचार संहीता के बारे में विशेष विस्तृत रूप से समझाया। सम्मान समारोह कार्यक्रम में प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी बाईचुंग भूटिया, आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री, उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री, भारत तिब्बत सहयोग मंच हावड़ा शाखा के अध्यक्ष मनीष सेठिया कोलकाता शाखा के अध्यक्ष एवं कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अनिल गोयंका ने किया ।तवांग यात्रा के यात्रियों ने अपनी शंकाओं का समाधान भी इस अवसर पर किया।
















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