गुवाहाटी, 16 नवम्बर । श्री गौहाटी गौशाला में तीन दिवसीय गोपाष्टमी का शुभारंभ आज होगा। ब्रज की संस्कृति का प्रमुख पर्व गोपाष्टमी की शुरुवात प्रातः 7 बजे गौ पूजन से किया जाएगा। सुबह 11 बजे कार्यकारिणी समिति के सदस्यों द्वारा झंडोत्तोलन किया जाएगा। आयोजन समिति के सभी सदस्य जोरों से पिछले कुछ दिनों से मेले की व्यवस्था बनाने में लगे हुए थे। गोपाष्टमी मेला हर साल बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाता है। सभी जातियों, समुदायों और धर्मों के लाखों लोग पवित्र गाय की पूजा करने के लिए आठगांव में श्री गौहाटी गोशाला जाते हैं और मेला का भी आनंद लेते हैं जहां विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
गोपाष्टमी के अवसर पर श्री गौहाटी गौशाला के बारे में हमने कुछ जानकारियां जुटाने की कोशिश की है।
क्या है श्री गौहाटी गौशाला का इतिहास?
श्री गौहाटी गोशाला (पूर्व में पिंजरापोल गौशाला) की स्थापना 23 फरवरी, 1916 में गुवाहाटी के आठगांव में स्व. हुक्मिचंदजी रामकृखदासजी अजितरिया द्वारा दान की गई 25 बिघा भूमि के एक भूखंड पर की गई थी। इसके बाद, गौशाला का विस्तार किया गया। लगभग 3 बिघा 1 कत्था और 3 बिघा 2 कत्था भूमि आठगांव के तत्कालीन गौशाला परिसर के निकट अमरलाल महंत और रंगलाल नूनिया से खरीदा गया था। विक्रम संवत 1973 में, कोलकाता के मैसर्स लालचंद कनिरम चौधरी ने गायों के लिए घास उगाने हेतु मालिगांव में स्थित 260 बिघा भूमि दान की थी। फिर विक्रम संवत 1976 में, 90 बिघा भूमि फाटासील में गायों के लिए घास उगाने के लिए खरीदी गई थी। मैसर्स रामलाल लालचंद, गुवाहाटी ने फाटासील में स्थित पिंजरपोल के लिए 10 बिघा से ज्यादा जमीन दान की थी।
कैसे होता है श्री गौहाटी गौशाला का संचालन?
सबसे पहले श्री गौहाटी गोशाला का संचालन एक कार्यकारिणी समिति गठित कर चालु की गयी थी। स्वर्गीय श्री नागमल केजरीवाल को प्रधान सचिव नियुक्त किया गया था, जिन्होंने कई सालों तक श्री गौहाटी गौशाला को अपनी सेवाएँ दी। उनकी सक्षम नेतृत्व के तहत, गोशाला ने प्रभावी ढंग से काम करना शुरू किया और अपने दायरे को बढ़ाया। वर्तमान में, श्री गौहाटी गौशाला की कार्यकारिणी समिति में 41 सदस्य हैं जिनमें 15 ट्रस्टी हैं। वर्तमान कार्यकारिणी समिति के रामगोपाल हरलालका अध्यक्ष एवं दीनदयाल सिवोटिया मंत्री है। सभी सदस्य दिन-प्रतिदिन के मामलों की देखभाल समय-समय पर ट्रस्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए करते हैं। कार्यकारिणी समिति द्वारा बनाई गई विभिन्न समितियां भी विशेष रूप से उन्हें सौंपे गए मामलों की देखभाल करती हैं। श्री गौहाटी गौशाला की वर्तमान कर्मचारियों की संख्या 125 है जिसमें प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, लेखाकार, दैनिक मजदूर और अन्य कार्यालय कर्मचारी इत्यादि शामिल हैं।
यह जानना भी जरुरी है
इस गौशाला में जैविक और रासायनिक खादों का निर्माण भी किया जाता है। गोबर और गोमूत्र पर भी कई अनुसंधान कार्य किए जाते हैं। मालीगांव गौशाला में बीमार और बुड्ढी हो चुकी गायों की देखभाल होती है। यहां विभिन्न तरह की सब्जियों का उत्पादन भी होता है जो कि गोबर खाद से उगाई जाती है। यह गौशाला धार्मिक और आस्था का इतना बड़ा केंद्र है कि भारत ही नहीं विश्व के तमाम महान संतों का प्रवचन इस गोशाला की धरती पर हो चुका है। असंख्य धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला निरंतर चलती रहती है। गौशाला का परिसर सुबह-सुबह व्यायाम एवं पैदल भ्रमण के लिए काफी सुविधाजनक है। मॉर्निंग वॉक के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग अपने स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए इस परिसर का लाभ उठाते हैं। गाय का ताजा दूध एक व्यवस्थित प्रणाली के जरिए लोगों में वितरित किया जाता है। जिसका लाभ सैकड़ों लोगों को प्राप्त होता है। समय-समय पर देश के अति विशिष्ट एवं विशिष्ट व्यक्ति गौशाला का दौरा कर प्रशंसा में दो शब्द लिखे बिना नहीं जाते हैं।
क्यों मनाते है गोपाष्टमी?
अनेकों मान्यताओं में से एक यह है की श्री कृष्ण ने कार्तिक, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा से सप्तमी तक गो, गोप, गोपियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को धारण किया था। 8वें दिन इन्द्र अहंकार रहित होकर भगवान की शरण में आये। कामधेनु ने श्रीकृष्ण का अभिषेक किया और उसी दिन से इनका नाम गोविन्द पड़ा। इसी समय से अष्टमी को गोपोष्टमी का पर्व मनाया जाने लगा, जो कि अब तक चला आ रहा है। श्री गौहाटी गौशाला में आयोजित होने वाला गोपाष्टमी मेला सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतिक ही नहीं है बल्कि इस तीन दिवसीय मेले में कई लोग अपनी दुकान लगाकर रोजगार भी प्राप्त करते हैं। इन दुकानदारों को कई महीने पहले से ही गोपाष्टमी मेले का इंतजार लगा रहता है ।








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