जयपुर, 19 नवम्बर । प्रदेश में चुनाव की चौसर बिछ चुकी है। दोनों पार्टियों ने ही अपने-अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। सात दिसंबर को मतदान होना है। मतदान के 17 दिन बाकी होने के बाद भी एयरपोर्ट पर चुनावी माहौल रंग नहीं लिया है। यहां पर इस बार नोटबंदी और जीएसटी का असर नजर आ रहा है। यहीं वजह है कि मतदान के कुछ दिन शेष रहने के बाद भी न तो जयपुर एयरपोर्ट पर चार्टर्ड विमानों का मूवमेंट बढ़ा है और न ही चुनावी सभाओं के लिए स्थायी हेलिकॉप्टर की अनुमति ली गई है।
दरअसल चुनावी रैलियों के लिए चार्टर्ड विमानों का इस्तेमाल आम है। 2013 के विधानसभा चुनाव कई बड़े नेताओं ने चार्टर विमानों और हेलिकॉप्टर्स का उपयोग किया था। खासतौर पर राजपा के प्रमुख रहे और वर्तमान में भाजपा का दामन थाम चुके किरोड़ीलाल मीणा ने स्थाई रूप से हेलिकॉप्टर किराए पर लेकर रैलियां की थी। नेताओं की बढ़ती मांग को देखते हुए दो विमानन कंपनियों ने स्थाई रूप से 2 हेलिकॉप्टर जयपुर एयरपोर्ट पर रखे थे। 2 हेलिकॉप्टर्स के अलावा कई चार्टर्ड विमानन कंपनियों ने भी विमान किराए पर दिए थे।
गत चुनाव में यह थी स्थिति : पिछले चुनाव में दो कंपनियों ने स्थाई रूप से हेलिकॉप्टर रखे थे। इस बार अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है। वर्तमान में अमित शाह और सचिन पायलट एक ही कंपनी के विमान उपयोग में ले रहे हैं। ये दोनों दिग्गज क्लब वन एयर कंपनी का चार्टर विमान उपयोग में ले रहे हैं। सीएम राजे उपयोग में लेती रही हैं एक निजी कंपनी का हेलिकॉप्टर। राहुल गांधी, प्रकाश जावड़ेकर ने भी चार्टर्ड विमान उपयोग किए हैं।
यह माना जा रहा है किराया : विमान कंपनियां प्रति घंटे डेढ़ से 2 लाख रुपए चार्ज कर रही है। दिल्ली से मंगवाने पर 3 से 4 लाख रुपए अतिरिक्त बढ़ जाते हैं। चुनाव में कंपनियों ने भी किराया बढ़ा दिया है। जयपुर में बेस बने तो 3 से 4 लाख की बचत होगी। हेलिकॉप्टर का चार्ज चार्टर विमान की तुलना में कम है। हेलिकॉप्टर 5 सीटर, जबकि चार्टर 10 सीटर हैं। अभी तक किसी भी पार्टी और कंपनी ने हेलिकॉप्टर और चार्टर प्लेन की स्थायी रूप से अनुमति नहीं ली है। कोई इच्छा जताते हैं तो अनुमति जारी कर दी जाएगी।








कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें