अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश रमेशचन्द्र लाहोटी को दिया राजस्थानी व्यक्तित्व सम्मान - Rise Plus

NEWS

Rise Plus

असम का सबसे सक्रिय हिंदी डिजिटल मीडिया


Post Top Ad

अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश रमेशचन्द्र लाहोटी को दिया राजस्थानी व्यक्तित्व सम्मान


कोलकाता। कमाकर खाना और परिश्रम के बलबूते लक्ष्मी का अर्जन करना मारवाड़ी समुदाय का मूलभूत सिद्धान्त है, और इसकी पहली घूंट माँ शैशव अवस्था में ही बच्चे को पिला देती है। इसीलिए सम्पूर्ण विश्व में हमारा देश अद्भुत है क्योंकि यहां साल का प्रत्येक दिवस मातृ और नारी दिवस है। उक्त कथन हैं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति श्री रमेश चन्द्र लाहोटी का। वे अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा कलामंदिर में आयोजित होली प्रीति मिलन सह सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मारवाड़ी एक ऐसी जाति है जो ठोकर खाकर संभलना जानती है। मारवाड़ी मार्ग में आये हुए पत्थरों से टकराकर लड़खड़ाता नहीं है बल्कि उन पत्थरों को सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ता है। उन्होंने युवा पीढ़ी के साथ बढ़ती खाई का जिक्र करते हुए कहा कि हमें उनके साथ निरन्तर परिचर्चा में रहना चाहिए, क्योंकि उनके पास समय का अभाव है। इससे जेनरेशन गेप खत्म होगा। श्री लाहोटी ने बच्चों को विरासत में धन के साथ-साथ संस्कार देने पर भी बल दिया। करीब 50 मिनट तक दिये गये न्यायमूर्ति के वक्तव्य के दौरान कलामंदिर का खचाखच भरा हाल उन्हें ध्यानपूर्वक सुनता रहा। 

इस मौके पर उन्हें सम्मेलन का सर्वोच्च राजस्थानी व्यक्तित्व सम्मान भी प्रदान किया गया। सम्मान के तहत पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नन्दलाल रुंगटा ने माला एवं श्रीफल, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरिप्रसाद कानोड़िया ने शॉल एवं पगड़ी, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रामअवतार पोद्दार ने एक लाख की सम्मान राशि का चेक तथा निर्वतमान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रह्लादराय अगरवाला ने प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। सम्मान के पश्चात सम्मान राशि के चेक को न्यायमूर्ति ने जनकल्याणकारी कार्यों में लगाने हेतु सम्मेलन को पुनः समर्पित कर दिया। इसके पूर्व श्री लाहोटी का संक्षिप्त परिचय अधिवक्ता श्री नन्दलाल सिंघानिया ने दिया। न्यायमूर्ति की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी लाहोटी का सम्मान श्रीमती प्रभा देवी सराफ ने किया। 

इसके पूर्व न्यायमूर्ति श्री लाहोटी के हाथों दीप प्रज्जवलन के साथ समारोह का शुभारम्भ हुआ। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संतोष सराफ ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि हमें अपने मांगलिक अवसरों पर अपव्यय को रोकना चाहिए। इसके लिए हमें निमंत्रण पत्र में ई-कार्ड को बढ़ावा देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पुलवामा में शहीद हुए हमारे वीर जवानों का जिक्र करते हुए कहा कि सम्मेलन ने पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का व्यापार न करने का प्रस्ताव पारित किया है, हम सबको इसका पालन करना चाहिए। मुख्य वक्ता सम्मेलन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सीताराम शर्मा ने कहा कि हमारे समाज के लिए यह गर्व की बात है कि श्री लाहोटी जी समाज के पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। इससे हमारे समाज का नाम रोशन हुआ है। आज सम्मेलन द्वारा किया जा रहा उऩका सम्मान समाज का सम्मान है। 

कार्यक्रम के प्रथम सत्र का सफल संचालन राष्ट्रीय महामंत्री श्री श्रीगोपाल झुनझुनवाला ने किया। धन्यवाद ज्ञापन दिया राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री कैलाशपति तोदी ने। दूसरे सत्र का संचालन करते हुए राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री श्री संजय हरलालका ने कवियों का परिचय उनकी ही रचनाओं के माध्यम से दिया। कवियों एवं अतिथियों का स्वागत अतिथियों का सम्मान फाईनेन्स कमेटी के चेयरमैन आत्माराम सोन्थलिया, राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री गोपाल अग्रवाल आदि ने किया। राजस्थान के भीलवाड़ा से आये श्री कैलाश मंडेला ने हाल में पाकिस्तान पर की गई सर्जिकल स्ट्राईक के मद्देनजर कुछ इस अंदाज में अपनी रचना सुनाई- तेरे ठसके जवर, तु है मेरे बब्बर, राग भारत की गाई, मजा आ गया। आँख उसको दिखाई मेरे शेर ने, पूँछ उसने दबाई मजा आ गया। लखनऊ से आये वीर रस के कवि श्री प्रख्यात मिश्रा ने सैनिकों की शहादत को यह कहकर सलाम किया कि हमारे सैनिक देश के बारे में कुछ ऐसा सोचते हैं- बोटी-बोटी कट जाऊँ या इंच-इंच बंट जाऊँ, या तो तिरंगे को लपेट घर आऊँगा या फिर तिरंगा सीमा पार लहराऊँगा। लखनऊ से ही पधारी गीतकार ड़ॉ. समुन दुबे ने अपने गीतों से समूचे वातावरण को एक नया रंग दिया। उनके गीत का अंदाज इस तरह था- थोड़ी तकरार, थोड़ा प्यार लेकर आई हूँ। अंखियों में सपने हजार लेके आई हूँ। कवि सम्मेलन का निराले अंदाज में संचालन करते हुए पद्मश्री से सम्मानित दिल्ली के मशहूर कवि श्री सुनील जोगी ने पाकिस्तान को इस तरह ललकारा- पुलवामा पर हमला करके, पीठ में खंजर घोंप दिया, हम भी ठहरे हिन्दुस्तानी, घर में घुसकर ठोक दिया, अब हर आतंकी की गर्दन पर हमरी सेना का पंजा हो, जो भी घाटी में रहते हैं, सबके हाथ तिरंगा हो। कार्यक्रम में डॉ. जुगल किशोर सराफ, हरि प्रसाद बुधिया, आनन्द अग्रवाल, सज्जन भजनका, रतन शाह, भानीराम सुरेका, शिव कुमार लोहिया, चम्पालाल सरावगी, दिनेश जैन, सम्पतमल बच्छावत, मुरारीलाल खेतान सहित भारी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नियमित रूप से WhatsApp पर हमारी खबर प्राप्त करने के लिए दिए गए 'SUBSCRIBE' बटन पर क्लिक करें