उमेश पारीक
सीकर। सीकर जिले के अजीतगढ़ निवासी कृषि वैज्ञानिक जगदीश प्रसाद पारीक को सोमवार राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कृषि के क्षेत्र में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कार मिलते ही अजीतगढ़ समेत क्षेत्र के गांवो में खुशी की लहर छा गई। 72 वर्षीय पारीक जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नवाचार करते रहे। उन्होंने अपने गांव के साथ देश का नाम भी रोशन किया है। पारीक ने नए-नए प्रयोग करते हुए किसान कृषि विशेषज्ञ का दर्जा प्राप्त किया। सन 1970 में पारीक ने खेती की शुरूआत की। जब उनके पिता का देहांत के कारण अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और शुरूआत में गोभी की पैदावार शुरू की और आधा किलो से लेकर पौन किलो गोभी का उत्पादन किया उन्होंने रासायनिक व कीटनाशक का उपयोग नहीं किया बल्कि गोबर से बनी हुई जैविक खाद का प्रयोग किया।
पारीक ने 25 किलो ढाई सौ ग्राम वजनी गोभी का फूल, 86 किलो कद्दू, 6 फुट लंबी घीया, 7 फुट लंबी तोरिया, 1 मीटर लंबा 2 इंच बैंगन, 5 किलो गोल बैंगन, ढाई सौ ग्राम मोटा प्याज, 3.30 फुट लंबी गाजर का उत्पादन कर चुके हैं। साथ ही अजीतगढ़ कलेक्शन के नाम पर स्वयं द्वारा गोभी का बीज भी पैदा कर चुके हैं और इसकी गोभी पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, अब्दुल कलाम, प्रणब मुखर्जी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व राज्यपाल मार्गेट अल्वा को भेंट कर चुके हैं। जगदीश जी पारीक को पद्मश्री मिलने पर पारीक सभा, जोरहाट के अध्यक्ष बाबुलाल तिवाडी व सचिव उमेश पारीक ने उनको बधाई दी। कृषि के क्षेत्र में जो कार्य किया है उससे सभी को प्रेरणा लेकर कार्य करना चाहिये, हमारे समाज को उन्होंने जो नाम रोशन किया उसके लिए पूरा पारीक समाज गर्व कर रहा है।








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