राज भवन में राज्यपाल अणुव्रत समिति के प्रतिनिधिमंडल से मिले
गुवाहाटी। अणुव्रत समिति गुवाहाटी के एक प्रतिनिधि मंडल ने राजभवन में असम के राज्यपाल महामहीम माननीय जगदीश मुखी जी से मुलाकात की एवं उनको अणुव्रत समिति द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। राज्यपाल महोदय ने अणुव्रत आंदोलन के अपने 40 वर्ष के अनुभव के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां समिति के सदस्यों को दी। उन्होंने कहा कि भारत में कई विदेशी धरती के संगठन व विघटनकारी ताकतें भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात कर उसे समाप्त करना चाहती है। ऐसे में अणुव्रत समिति जैसी कई अन्य सामाजिक व धार्मिक संस्थाएं भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण रखने में कार्य कर रही है। ऐसी संस्थाओं की आज के समय में बहुत ही आवश्यकता है। राज्यपाल महोदय ने कहा कि गत 40 वर्षो से वह अनुव्रत आंदोलन के बारे में सुनते आ रहे हैं एवं कई कार्यक्रम में उन्होंने भाग भी लिया। यह संस्था सामाजिक संस्कार के काफी अच्छे कार्य कर रही है। अणुव्रत समिति के कार्यकारिणी सदस्य दिलीप दुगड़ ने अणुव्रत समिति की कार्य प्रणाली, गति-प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर अणुव्रत समिति के राजकरण जैन ने राज्यपाल महोदय द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर देते हुए कहा की तेरापंथ धर्म संघ के आचार्यवर का जहां भी चतुर्मास होता है उस चतुर्मास के अवसर पर सप्ताह व्यापी अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का आयोजन किया जाता है। जिसमें देश के सभी प्रतिनिधि भाग लेते हैं। अधिवेशन में पूज्य गुरु देव अणुव्रत महा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पूरे वर्ष भर के कार्यक्रम की निर्देशना देते हैं एवं उसी के अनुसार पूरे वर्ष भर में शाखा समितियां अपना कार्य करती है। इससे पहले अणुव्रत समिति, गुवाहाटी के संस्थापक अध्यक्ष निर्मल चौरड़िया ने फुलाम गमछा से राज्यपाल महोदय का अभिनंदन किया। राजकरण जैन ने अणुव्रत पट्ट से अभिनन्दन किया। अध्यक्ष छतर सिंह जैन तथा उपाध्यक्ष बजरंग बैद ने अणुव्रत के 11 नियमों का प्रतीक चिन्ह, उपाध्यक्ष (प्रथम) बजरंग डोसी ने अणुव्रत का बैज, सह मंत्री मनोज सेठिया ने अणुव्रत पत्रिका, संजय चौरडिया ने अणुव्रत साहित्य, जय कुमार भंसाली ने अनुव्रत आचार संहीता पत्र राज्यपाल महोदय को भेंट प्रदान की। इस अवसर पर झंकार दूधोडिया के अलावा कार्यकारिणी समिति सदस्य संपत मिश्र भी उपस्थित थे। अणुव्रत समिती ने राज्यपाल महोदय को समिति की मानद सदस्यता प्रदान की जिसे राज्यपाल महोदय ने सहर्ष स्वीकार किया।








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