लखीमपुर से ओम प्रकाश तिवारी
कुल 600 अंकों में हासिल किए 594 अंक
लखीमपुर। असम माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा का परीक्षा फल घोषित हुआ। इसमें लखीमपुर जिले के नारायणपुर स्थित शंकरदेव शीशु विद्या निकेतन की छात्रा मेघाश्री बोरा ने 600 अंकों में से 594 अंक पाकर पूरे असम में पहला स्थान प्राप्त किया। उनके इस परीक्षाफल ने नारायणपुर सहित लखीमपुर जिले को गौरवान्वित किया है। मेधाश्री बोरा को इस दसवीं की परीक्षा में असमिया विषय में 100 में से 97, अंग्रेजी में 97 अंक मिले इसके अलावे गणित, विज्ञान, समाज अध्ययन तथा उच्च गणित प्रत्येक में 100 में से 100 अंक प्राप्त हुए हैं। उल्लेखनीय है कि मेघाश्री बोरा नारायणपुर निवासी स्वर्गीय गोकुल बोरा तथा विनीता सईकिया बोरा की सुपुत्री हैं।
आज मेघाश्री के साथ राइज प्लस के वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश तिवारी का साक्षात्कार इस प्रकार रहा:
मेघाश्री: मेरे परीक्षाफल से हमारे शिक्षक, घर वाले तथा जिले के सब लोग खुश हैं इसलिए मुझे अच्छा लग रहा है।
प्रश्न: कब से आपने असम में प्रथम स्थान पर आने का लक्ष्य बनाया ?
मेघाश्री: कक्षा 8 से हमारे विद्यालय के सभी शिक्षकों ने मेरे ऊपर आशा लगाई कि में दसवीं की परीक्षा में काफी अच्छा रिजल्ट करूंगी। उसी समय से मैंने मन बनाया कि मैं परिश्रम कर अपने शिक्षकों की आशा को पूरा करूंगी।
प्रश्न :आप प्रतिदिन कितना घंटा पढ़ती थी ?
मेघाश्री: मेरे पढने का घंटा के हिसाब से कोई रूटीन नहीं था। बस अपनी सुविधा के अनुसार में नियमित पढ़ती थी। और जब विद्यालय बंद होता था परीक्षा के लिए, तो में परीक्षा की तैयारी करती थी।
प्रश्न :आपके पढ़ने की शैली किस प्रकार की थी ?
मेघाश्री: में विषय को रटकर याद करने का एकदम समर्थन नहीं करती बल्कि विषय वस्तु को पूरी तरह समझ कर उसे अपने तरीके से प्रस्तुत करने पर विश्वास करती हूं।
प्रश्न : आपका पसंदीदा विषय कौन कौन सा है ?
मेघाश्री : विज्ञान, गणित, उच्च गणित, अंग्रेजी।
प्रश्न: आज अपनी इस सफलता के अवसर पर आप अपने दिल से किस को याद करना चाहेंगी?
मेघाश्री: अपनी मां, स्वर्गीय पिता, मेरे विद्यालय के गुरुजन तथा मुझे घरेलू शिक्षक के रूप में सहायता कर मेरा मार्गदर्शन करने वाले सभी शिक्षक गणों को।
प्रश्न: छात्रों में सफलता हासिल करने के लिए कौन सा गुण होना चाहिए?
मेघाश्री : कठोर परिश्रम, एकाग्रता, धैर्य। कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है।
प्रश्न : आप जीवन में क्या करना चाहती हैं?
मेघाश्री : में एक सफल चिकित्सक बनना चाहती हूं।
प्रश्न :आप चिकित्सक क्यों बनना चाहती हैं ?
मेघाश्री : मेरे विचार से मानवता की सेवा के लिए चिकित्सक होना आवश्यक है। हमारे देश में बहुत सारे लोग आज भी चिकित्सा के बगैर मर जाते हैं। आर्थिक अभाव के कारण वे अपने चिकित्सा नहीं करा पाते। में एक सफल चिकित्सक होकर वैसे लोगों की सेवा करना चाहती हूं।
प्रश्न : आपके विचार से विद्यार्थियों के अभिभावकों को विद्यार्थियों से कैसा व्यवहार करना चाहिए ?
मेघाश्री: विद्यार्थियों के अभिभावकों को अपने बच्चों पर विश्वास करना चाहिए तथा उन्हें यह कहकर उत्साहित करना चाहिए कि उनका बच्चा हर लक्ष्य प्राप्त कर सकता है। उन्हें बच्चों को रात दिन पढ़ो-पढ़ो नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से बच्चों का पढ़ाई के प्रति विरक्ति आ जाती है।
प्रश्न: विद्यार्थियों को प्रतिकूल परिस्थिति में कैसी पढ़ाई करनी चाहिए ?
मेघाश्री : सामाजिक परिवेश चाहे जैसा भी हो छात्र-छात्राओं को अपना कर्तव्य नियमित रूप से पालन करना चाहिए। क्योंकि विद्यार्थियों के लिए कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है ।
प्रश्न: आपको पढ़ाई के अलावा और क्या-क्या पसंद है ?
मेघाश्री : मुझे पढ़ाई के अलावा चित्रकला और बाहरी किताबें पढ़ना पसंद है।
प्रश्न :आपको कैसी किताबें पढ़ना पसंद है ?
मेघाश्री : मुझे मनीकुंतला भट्टाचार्य और अनुराधा पुजारी की किताबें पसंद है।
प्रश्न: आप किस को अपना आदर्श मानती हैं ?
मेघाश्री : डॉक्टर भूपेंद्र नाथ सईकिया। डॉक्टर भूपेंद्र नाथ सईकिया विज्ञान के छात्र थे इसके बावजूद भी असमिया साहित्य के प्रति उनका बहुत बड़ा है अवधान है।
अंत में मेघाश्री ने अपनी इस सफलता का सारा श्रेय अपने विद्यालय संकरदेव सीशु विद्या निकेतन के शिक्षकों को दिया और कहा कि उनके शिक्षक कक्षा 8 से ही उनके ऊपर विशेष ध्यान देते थे और सदैव निगरानी रखते थे कि किस विषय की किस विषय वस्तु में उन्हें परेशानी है। आज उनके मार्गदर्शन और निगरानी के कारण ही वे असम के शीर्ष स्थान को प्राप्त कर पाई है।







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