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सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने किया सरकार के साथ एकजुटता का इजहार


नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा के घटनाक्रम पर शुक्रवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करने के मुद्दे सरकार और देश की सेनाओं के साथ पूरी एकजुटता का इजहार किया। इन नेताओं ने कहा कि देश की रक्षा के लिए सरकार जो भी कदम उठाएगी, उसका पूरा देश समर्थन करेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति, जनता दल (यू), बीजू जनता दल, लोक जनशक्ति पार्टी, अन्नाद्रमुक, द्रमुक शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सहित अन्य प्रमुख राष्ट्रीय दलों ने भाग लिया।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भारत-चीन सीमा के घटनाक्रम के बारे में मोदी सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि घुसपैठ कब और कहां हुई? इस संबंध में सरकार को क्या खुफिया जानकारी थी और स्थिति का सामना करने के लिए क्या समय पर कदम उठाए गए। उन्होंने सर्वदलीय बैठक देर से आयोजित किए जाने पर एतराज जताया।  उनका कहना था कि इतने दिनों बाद हुई इस बैठक में भी हम कई विषयों से अनजान है और पार्टी के कुछ प्रश्न है जिनका उत्तर दिया जाना चाहिए। चीन की गतिविधियों को लेकर पूछे गए सवालों के बाद उन्होंने कहा कि नियमित तौर पर विपक्षी पार्टियों को जानकारी दी जानी चाहिए।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने कहा कि चीन में तानाशाही है और भारत में लोकतंत्र है। चीन अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकता है जबकि भारत को कुछ करने के लिए एकता का प्रदर्शन करना होगा। हम सरकार के साथ खड़े हैं। चीन को भारत के टेलीकॉम, रेलवे और उड्डयन क्षेत्र में प्रवेश का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए। हमें कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन हमें चीन को रोकना चाहिए।

जनता दल (यू) के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि चीन का भारत के साथ व्यवहार सर्वविदित है। उसका मुकाबला करने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को एकजुट होकर भारत सरकार का साथ देना चाहिए। चीन का बहुत सा सामान भारतीय बाजार में है। चीनी सस्ता सामान जल्द खराब हो जाता है। इस सामान में ज्यादातर प्लास्टिक का उपयोग होता है और यह पर्यावरण के लिहाज से भी ठीक नहीं है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने कहा कि सभी पार्टियां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्र सरकार के साथ है। चीन का स्वभाव धोखेबाजी वाला है और उसे यह बताना जरूरी है कि भारत मजबूत है, मजबूर नहीं।

एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा कि सैनिकों के पास हथियार थे या नहीं, यह अंतरराष्ट्रीय नियमों से तय होते हैं और हमें उनका सम्मान करना चाहिए।

द्रमुक नेता एमके स्टालिन ने कहा कि देशभक्ति से जुड़े मुद्दों पर हम सब एक हैं। भाकपा नेता डी राजा ने सलाह दी कि हमें अमेरिका के प्रयासों से दूरी बनानी चाहिए। वाईएसआर कांग्रेस के नेता जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाया लेकिन चीन हमें कमजोर करने की कोशिश में लगा हुआ है।

अकाली दल के नेता सुखबीर बादल ने कहा कि अब किसी तरह के प्रश्न उठाने का समय नहीं है। हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ खड़े हैं और यह संदेश चीन तक पहुंच जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने कहा कि चीन और पाकिस्तान की भारत को लेकर मंशा सही नहीं है। हमें चीन के सामान का कुड़ाघर बनने से बचना चाहिए और वहां से होने वाले आयात पर 300 प्रतिशत शुल्क लगाना चाहिए। एनपीपी नेता कोनार्ड संगमा ने कहा कि हमें सीमा से सटे इलाकों में सैन्य ढांचा निर्माण को जारी रखना चाहिए। चीन की म्यांमार और बांग्लादेश में चल रही गतिविधियां चिंता का सबब बनी हुई है।

सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के नेता प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि हमारा प्रधानमंत्री पर पूरा भरोसा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर वह कठोर कदम उठाते हैं। बीजू जनता दल के पिनाकी मिश्रा ने कहा कि हम सरकार के साथ बिना किसी शर्त के साथ खड़े हैं। (हि.स.)

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