ओमप्रकाश तिवारी व राजेश राठी
लखीमपुर। राज्य में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राजनीतिक दलों में सांगठनिक तत्परता काफी तेज नजर आ रही है। वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दलों से टिकट पाने की उम्मीद लगाए बैठे उम्मीदवारों में सांगठिक काम-काज में वृद्धि व तत्परता भी अपनी चरम पर है। 111 नंबर लखीमपुर विधानसभा क्षेत्र में अगप-भाजपा-कांग्रेस आदि दलों द्वारा मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए कई तरह की योजनाएं बनाई जा रही है। विभिन्न जाति-जनगोष्ठी के मतदाताओं के योग से गठित इस समष्टि में इस बार दो लाख से अधिक मतदाता उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। राज्य में महत्वपूर्ण समष्टि के रूप में विवेचित लखीमपुर समष्टि में इस बार चुनाव काफी रोमांचक होगा, इसपर किसी को संदेह नहीं है। अगप और भाजपा गठबंधन दल के अंतर्गत आने वाले इस समष्टि से इस बार अगप के उम्मीदवार को या भाजपा के उम्मीदवार को चुनाव में उतारा जाएगा इसको लेकर कसमकस जारी है। विगत विधानसभा चुनाव में अगप-भाजपा गठबंधन के प्रार्थी उत्तपल दत्त ने लगभग 53 हजार वोट प्राप्त कर जीत हासिल की। इसके विपरीत कांग्रेस के उम्मीदवार डॉ. जयप्रकाश दास ने 40 हजार वोट प्राप्त कर द्वितीय स्थान पर रहे। वहीं कांग्रेस से टिकट न मिलने के कारण राष्ट्रीय दल से निकलकर निर्दलीय प्रार्थी के रूप में चुनावी मैदान में उतरे पूर्व विधायक घन बूढ़ागोहाईं ने 23 हजार से अधिक वोट प्राप्त कर कोई उपलब्धि तो प्राप्त नहीं कर पाए, मगर कांग्रेसी उम्मीदवार को हरवाने में अहम भूमिका निभाई। इस बार पुन: कांग्रेस से दो शक्तिशाली नेता तथा लखीमपुर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. जयप्रकाश दास और पूर्व विधायक घन बूढ़ागोहाई कांग्रेस से टिकट पाने के लिए सबल उम्मीदवार के रूप में खड़े हैं। इस बीच पुन: युवा नेता दीपेन बोरो को उम्मीदवारी मिलने की जुगत लगाने की बात चर्चाओं में है। घन बूढ़ागोहाईं और जयप्रकाश दास समष्टि में अपने अपने तरीके से सांगठनिक बुनियाद मजबूत करने में अथक प्रयास कर रहे हैं। वहीं इस क्षेत्र में घन बूढ़ागोहाईं जेपी दास से कुछ आगे हैं। दूसरी ओर पूर्व कांग्रेस विधायक समष्टि के विभिन्न छापोरी इलाकों में सांगठनिक तत्परात को तीव्र गति से आगे बढ़ाते दिख रहे हैं। वे वरिष्ठ कांग्रेसी, स्वतंत्रता सेनानी, गांव पंचायत, मंडल कांग्रेस आदि से संपर्क कर अपना विश्वास प्राप्त करने के प्रयासों में जुटे हैं। वे अपने दल की सांगठनिक स्थिति सुदृढ़ करने में काफी मेहनत कर कोई कोर कसर नहीं छोडऩा चाह रहे हैं। दूसरी ओर यदि अगप केंद्रीय नेता तथा पूर्व मंत्री उत्तपल दत्त दल को टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय रूप से भी चुनाव में उतर सकते हैं, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं। लखीमपुर में 25 वर्षों से अधिक समय कुर्सी दखल करते आ रहे अगप के उत्पल दत्त यदि टिकन न मिलने के कारण निर्दलीय प्रार्थी के रूप में चुनाव में उतरते हैं तो इसका लाभ सबसे अधिक कांग्रेस दल को होगा। क्योंकि भाजपा और अगप में वोट विभाजन हुआ तो इसका सीधा-सीधा लाभ विपक्षी पार्टी को मिलेगा। उल्लेखनीय है कि इस बार लखीमपुर समष्टि से अगप प्रार्थी को टिकट न देने के लिए भाजपा जिला समिति भाजपा के शीर्ष नेताओं पर काफी मांग कर रही है। इस बार भाजपा के प्रार्थी को ही इस महत्वपूर्ण समष्टि से टिकट देने का दबाव बना रहे हैं। फलस्वरूप दोनों दलों के बीच शीत युद्ध जारी है। इस बार गेरुवा दल से प्रार्थी के रूप में समाजसेवी तथा लखीमपुर बीएड कॉलेज के अध्यक्ष रुक्म गोहाईं बरुवा, भाजपा जिला फनीधर बरुवा, कटन कॉलेज के पूर्व साधारण सचिव तथा आसू नेता जगदीश दत्त, युव नेता मानव डेका, डॉ. मुकुल बोरा, भदेश्वर बरुवा आदि के नाम चर्चाओं में हैं। उल्लेखित सभी लोग अपने अपने स्तर पर सांगठनिक तत्परता तेज कर दी है। उल्लेखनीय बात यह है कि विगत संसदीय निर्वाचन में लखीमपुर विधानसभा समष्टि में भाजपा प्रार्थी ने 75 हजार से अधिक वोट प्राप्त करने के दल के लोगों को उल्लासित कर रखा है। कांग्रेस ने एमपी के चुनाव में इस क्षेत्र से 51 हजार 389 वोट प्राप्त किए थे। भाजपा के सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार इस बार भाजपा अगप के लिए इस समष्टि को किसी भी कीमत पर छोडऩे वाली नहीं है। दूसरी ओर अगप के सूत्र के अनुसार इस बार उत्पल दत्त को अगप से टिकट मिलना बिलकुल तय है। संभवत: चुनाव में खुद अपनी पसीने से सींच कर खड़ा किए दल को वे कभी छोड़कर नहीं जाएंगे, फिर भी कुछ लोगों का मानना है कि इस बार टिकट न मिलने पर वे अगप को छोड़कर भाजपा में भी शामिल हो सकते हैं। वहीं एक सूत्र ने बाताया कि दोनों ही दल नए चेहरे को मैदान में उतारेगी। उल्लेखनीय है कि आसू के पूर्व केंद्रीय नेता जगदीश दत्त का घर घिलामरात है फिर भी वे अब केबी रोड के निवासी होने के साथ ही उत्तर लखीमपुर नगर के तीन नंबर वार्ड के थूनाई पथ में उनका अपना घर है। वे अभी तक हजार लोगों के घर जाकर जनसंपर्क करने के साथ ही समष्टि के प्रति गांव के चार पांच घर के लोगों से मिलाकर बातचीत कर चुके हैं। दल के अन्यतम टिकट के प्रत्याशी तथा जिला अध्यक्ष फणीधर बरुवा भी विभिन्न सभा समितियों के जरिए लोगों से संपर्क करते दिख रहे हैं। इसी तरह रुक्म गोहाईं बरुवा आर एसएस की तरफ से संकेत प्राप्त करने के बाद चुनावी तत्परता बनाए हुए हैं। दूसरी ओर राज्य में नवगठित एजेपी और राइजर दल की चुनावी गतिविधियां काफी धीमी नजर आ रही है। दोनों नए दल अभी तक जिले में शक्तिशाली रुप में नजर नहीं आ रहे हैं। संभवत: उपयुक्त नेता की कमी के कारण दोनों दल की स्थिति लखीमपुर में संतोषजनक नहीं होने की चर्चा लोगों में बनी हुई है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कांग्रेस का इस महायुद्ध में लखीमपुर विशेष प्रभाव नहीं दिख रहा है। उल्लेखनीय है कि विधायक उत्पल दत्त की पूर्व जनप्रियता समष्टि में वर्तमान कुछ कम होता दिख रहा है। लोगों का कहना है कि वे पूर्व की तरह काम करने में सफल नहीं हुए हैं। मिङ्क्षसग जातीय संगठन ने उनको प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचन तथा दलीय काम काज में बाधा देकर उनका विरोध किया। ऐसे में इस बार समष्टि से उनकी जीत पर प्रश्र चिन्ह लगता दिख रहा है। अंतत: अगप-भाजपा प्रार्थी यदि एक हुए तो मित्रदल की जीत की संभावना अधिक है। अन्यथा समष्टि में कांग्रेस की जीत प्राय: निश्चित है। इन सब के बीच पुन: रानी नरह की विभाजन की राजनीति अभी बाकी है। अंतत: सटीक परिणाम के लिए सभी तक चुनाव के परिणामों के आने तक इंतजार करना होगा।















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