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मानव भारती विवि ने बांटी 36 हजार फर्जी डिग्रियां


कई राज्यों में फैला फर्जीवाड़े का जाल, विवि बनाने को लेकर भी की जा रही है जांच 


शिमला। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय कुंडू ने कहा है कि सोलन जिला स्थित निजी विश्वविद्यालय मानव भारती ने करीब 41 हजार डिग्रियां बांटी, जिनमें से जांच में करीब पांच हजार डिग्रियों को रेगुलेटरी अथारिटी ने सही बताया है। इस तरह करीब 36 हजार डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं। फर्जीवाड़े का यह खेल कई राज्यों में चला हुआ था। फर्जी डिग्रियाें का धंधा कैश में चलता था। फर्जी डिग्री की जांच कर रही हिमाचल पुलिस की एसआईटी ने अपनी जांच का दायरा अब तक 17 राज्यों तक फैलाया है।  

शनिवार को शिमला में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए संजय कुंडू ने कहा कि पुलिस की एसआईटी मानव भारती विश्वविद्यालय (विवि) को बनाने को लेकर भी जांच कर रही है। एसआईटी अब यह देख रही है कि युनिवर्सिटी आखिर कैसी बनी है। अभी तक की जांच का केंद्र बिंदू फर्जी डिग्रियां बेचने का था, मगर अब इसके गठन को लेकर भी जांच की जा रही है। इस मामले में एसआईटी एफआईआर दर्ज कर सकती है।

उन्होंने बताया कि हिमाचल में मानव भारती युनिवर्सिटी खोलने को मंजूरी 2009 में दी गई थी। हालांकि यूनिवर्सिटी बनाने के लिए पहले 2008 में दो बार प्रोपोजल आए, मगर सरकार ने मानव भारती ट्रस्ट की फाइनांशियल और एजुकेशनल बैकग्राउंड न होने के कारण यूनिवर्सिटी खोलने के प्रोपोजल को निरस्त कर दिया था। इसके बाद आरोपी ट्रस्ट ने करनाल में चल रहे अपने एक संस्थान के दस्तावेजों के आधार पर दोबारा से आवेदन किया और यूनिवर्सिटी चलाने के लिए एलओआई (लैटर आफ इंटेंट) हासिल कर लिया। 

उन्होंने बताया कि अभी तक की गई कार्रवाई एक आइसबर्ग की तरह है, अभी जांच चल रही है और इसमें कई खुलासे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि युनिवर्सिटी कैसेे बनी इसकी जांच की जाएगी और इसके आधार एक और एफआईआर दर्ज की जा सकती है।   

डीजीपी ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने डिग्री के फर्जीवाड़े का काफी रिकार्ड नष्ट कर दिया है। इसके बावजूद एसआईटी को जांच के दौरान 55 हार्ड डिस्क मिलीं, इनमें से 14 हार्ड डिस्क की जांच पूरी कर ली गई हैं। इस जांच में कई अहम सुराग एसआईटी को मिले हैं। पुलिस ने फर्जी डिग्री माले में नवंबर 2020 में धर्मपुर थाने में तीन तीन एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद इस मामले की जांच सरकार ने एसआईटी को सौंपी। उन्होंने बताया कि अब तक इस मामले में एसआईटी ने अब तक 275 से पूछताछ की और राजकुमार राणा समेत कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें दो अभी तक न्यायिक हिरासत में है। 

उन्होंने बताया कि एसआईटी ने इस पूरे मामले की हर पहलू से जांच की है। जांच के दौरान अभी तक मानव भारती ट्रस्ट की 440 करोड़ की संपत्तियां पाई गई हैं। इनमें से 194.17 करोड़ की संपत्तियां काले धन से बनाई पाई गई हैं। एसआईटी की जांच के बाद ईडी ने ये संपत्तियां अटैच कर दी हैं। बताया कि ट्रस्ट के चेयरमैन राजकुमार राणा का पास्पोर्ट जब्त किया गया है। राणा की पत्नी, बेटी और बेटा अभी आस्ट्रेलिया में है जिनको भारत प्रत्यार्पण करने के लिए प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। (हि.स.)

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