नई दिल्ली। राज्यसभा में मंगलवार को अशांत पड़ोसी देश म्यांमार के शरणार्थियों के मिजोरम में आने का मामला उठाया गया।
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान मिजो नेशनल फ्रंट के के. वानलालवेना ने यह मामला उठाते हुए कहा कि हाल में मिजोरम में म्यांमार से 300 शरणार्थी आए हैं। इनमें म्यांमार पुलिस के 150 जवान भी हैं, जो सैनिक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ दे रहे थे। उन्होंने कहा कि मिजोरम सरकार स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर इन शरणार्थियों की मदद कर रही है। केंद्र की ओर से इस मामले में अभी कोई सहायता नहीं दी गई है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती राज्यों को निर्देश जारी किया है कि वे म्यांमार के शरणार्थियों को अपने यहां न आने दें। केंद्र ने असम राइफल्स को यह निर्देश दिया है कि वह म्यांमार से किसी भी शरणार्थी को आने से रोके। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह म्यांमार के शरणार्थियों के प्रति मानवीय रवैया अपनाए। इन शरणार्थियों को यदि वापस भेजा गया तो उनकी जान को खतरा है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में यह भारत की जिम्मेदारी है कि वह म्यांमार के लोकतंत्र समर्थक लोगों का साथ दे और वहां लोकतंत्र की बहाली में साथ दे।
वानलालवेना ने यह भी मांग की कि केंद्र सरकार म्यांमार के शरणार्थियों के बारे में अपनी राय बदले।
उल्लेखनीय है कि म्यांमार में संसदीय चुनाव के बाद सैनिक तख्तापलट हुआ है तथा आंग सांग सू की सहित राजनेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। सैनिक शासन के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों लोग हताहत हुए हैं। (हि.स.)








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