गुवाहाटी। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने एक बयान जारी कर कहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों से यह साबित होता है कि वे उस संस्कृति के बारे में कितना जानते हैं जिसका वे दावा करते हैं कि वे यहां के लोगों की रक्षा करने आए हैं।
एपीसीसी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने 15वीं शताब्दी के संत श्रीमंत शंकरदेव के बारे में बातें की, जो घुसपैठियों के खिलाफ लड़े हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि श्रीमंत शंकरदेव ने किसके खिलाफ लड़ाई लड़ी। श्रीमंत शंकरदेव, उन शोषण के खिलाफ थे, जिन्होंने मनुस्मृति द्वारा निर्धारित विचारधाराओं और हठधर्मिता का पालन किया। साथ ही मूर्ति पूजा के खिलाफ भी, वह समाज को आत्मसात करने में विश्वास रखते थे और जाति व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहे थे। इसलिए मुख्यमंत्री योगी को इतिहास से सबक लेने की जरूरत है।
कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने पिछले असम दौरे के दौरान लचित बरफुकन को एक स्वतंत्रता सेनानी बताया था, जबकि लाचित बरफुकन एक आहोम सेनानी थे, जिन्होंने 1671 में सराईघाट की प्रसिद्ध लड़ाई लड़ी थी। भाजपा श्रीमंत शंकरदेव और वीर लाचित बरफुकन के बारे में बात करती है। भाजपा नेता अभी तक नहीं जानते कि वे कौन थे या वे किसके लिए खड़े थे। ऐसे में एपीसीसी कुछ इतिहास की किताबें मोदी और योगी को उपहार में देना चाहेगी।
कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सिर्फ हवा में बातें करती है और सोचती है कि असम के लोगों को कुछ भी नजर नहीं आता है। वे असमिया लोगों पर नागपुर की संस्कृति को थोपने की कोशिश कर रहे हैं और असम के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि कैसे नागपुर संस्कृति असमिया संस्कृति को घेर सकती है और नष्ट कर सकती है। (हि.स.)








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