गुवाहाटी। असम विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से आरंभ हुआ। सत्र के पहले ही दिन विपक्ष ने सदन के बाहर जमकर सरकार की नीतियों का विरोध किया। विपक्ष ने मुख्य रूप से हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा द्वारा विधायकों के अधिकार को लेकर की गयी टिप्पणी पर विपक्ष ने सदन के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए कहा कि गणतंत्र की रक्षा करें। कांग्रेस और एआईयूडीएफ के विधायकों ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। विपक्षी विधायकों ने मांग की कि मुख्यमंत्री सरभोग की जनसभा में की गयी अपनी टिप्पणी को वापस लें।
सदन में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के विधायक देवब्रत सैकिया ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री एक विधायक की भूमिका और जिम्मेदारियों के बारे में गलत सूचना फैलाकर और सत्ता को कम करने की कोशिश करके राज्य में एक सत्तावादी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह लोकतंत्र पर एक गंभीर संकट है।
उन्होंने कहा कि संविधान विशेष रूप से विधायकों की भूमिका और जिम्मेदारियों का उल्लेख करता है। विधायक अन्य बातों के अलावा इस बात पर गौर करेंगे कि क्या योजना का लाभ उनके निर्वाचन क्षेत्र में जनता को उपलब्ध कराया गया है। विधायक यहां सिर्फ कानून बनाने और अध्यक्ष के सामने बोलने के लिए नहीं हैं।
राइजर दल के पहली बार शिवसागर से चुने गये विधायक और देशद्रोह के आरोप में लंबे समय तक जेल में बंद रहने के बाद रिहा होने वाले अखिल गोगोई ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री को अपरिपक्व व्यक्ति की तरह नहीं बोलना चाहिए। लोकतंत्र और संविधान का सम्मान करना चाहिए।
इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा था कि एक विधायक का अधिकार केवल कानून बनाने का होता है और उसे लागू करना मंत्रियों पर निर्भर करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक वे मुख्यमंत्री हैं सभी सरकारी मामले, जिसमें उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति भी शामिल है, मंत्रियों द्वारा सुनी जाएगी, न कि विधायकों द्वारा। (हि.स.)








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