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मुख्यमंत्री ने स्वदेशी मुस्लिम समुदाय के बुद्धिजीवियों और प्रमुख नागरिकों से की बातचीत

 


स्थानीय मुस्लिम आबादी के सशक्तिकरण के लिए उप समितियां बनाएगी सरकार

गुवाहाटी। मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने गुवाहाटी में असम प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज परिसर में राज्य के स्थानीय मुस्लिम समुदाय के बुद्धिजीवियों और प्रमुख नागरिकों के साथ रविवार को एक संवादात्मक सत्र "अलाप-अलोचना - धार्मिक अल्पसंख्यकों को सशक्त बनाना" में भाग लिया।


इस अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री डॉ सरमा ने कहा कि असम सरकार ने राज्य में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंटरैक्टिव कार्यक्रम का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय मुस्लिम आबादी असमिया समाज का एक अभिन्न अंग होने के कारण उनके त्वरित विकास की आवश्यकता है। ताकि, राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बरकरार रखते हुए राज्य के विकास की कहानी में मुस्लिम समुदाय अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।


चर्चा में भाग लेते हुए, पद्मश्री डॉ इलियास अली, पद्मश्री एली अहमद, सैयद एसके आलम, वासबीर हुसैन, डॉ एसआई अहमद, नेकिबुर जमान समेत समुदाय की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने स्थानीय मुस्लिम आबादी को प्रभावित करने वाले सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर प्रकाश डाला। इस दौरान कई मूल्यवान सुझाव भी सामने आए।


चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि असम सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण, वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तिकरण आदि मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए स्थानीय मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ आठ उप-समूह बनाएगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक उप-समूह में समुदाय से एक अध्यक्ष और सरकार की ओर से एक सदस्य सचिव होंगे, जो तीन महीने के भीतर विस्तृत चर्चा के बाद सौंपे गए मामलों पर अपनी सिफारिशें लेकर आएगा।


मुख्यमंत्री ने बताया सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार राज्य की स्थानीय मुस्लिम आबादी के सशक्तिकरण के लिए एक रोडमैप तैयार करेगी जिसे पांच साल की अवधि में लागू किया जाएगा।


कार्यक्रम में अल्पसंख्यक एवं विकास विभाग कल्याण मंत्री चंद्र मोहन पटवारी, शिक्षा मंत्री डॉ रनोज पेगू और विधायक एवं मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव जयंत मल्ला बरुवा भी मौजूद थे। (हि.स.)


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