ओमप्रकाश तिवारी व राजेश राठी
घटना क्रिश्चियन धर्म का प्रचार करने वाला रंजन सूतीया की गिरफ्तारी
लखीमपुर। श्रीमत शंकरदेव और माधव देव के अभूतपूर्व छवि को विकृत कर क्रिश्चियन धर्म के प्रचार प्रसार के क्षेत्र में व्यवहार करने का जघन्य अपराध किया है रंजन सूतीया ने। उसने श्रीमत शंकरदेव और माधव देव के अभूतपूर्व सांस्कृतिक देव मंत्र, मांगलिक शब्द और गुरुजनों की वाणी को विकृति रूप मे परिवर्तित कर उसका यिशु नाम से नामकरण कर उसका संचालन कर क्रिश्चियन धर्म के प्रचार के लिए व्यवहृत किया है। जोकि श्रीमद् शंकरदेव और माधव देव द्वारा चलाए गए हिंदू धर्म की परंपरा और संस्कृति पर एक कुठाराघात है। उसका यह अपराध कतई क्षमा के योग्य नहीं है। ऐसा अपराध करने के बावजूद भी उसने भ्रांति मुलक स्पष्टीकरण देकर एक और अपराध किया रंजन सूतीया ने। ऐसा मंतव्य हिंदू युवा छात्र परिषद की लखीमपुर जिला समिति के अध्यक्ष जुग्मा ज्योति दत्ता तथा महासचिव घनकांत बोरा( रूपम) ने संवाददाताओं को प्रेरित किए गए एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दिया। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि निरंजन सुतिया के खिलाफ हिंदू युवा छात्र परिषद द्वारा 24 जुलाई 2011 को 135/ 21 नंबर की दी गई प्राथमिकी के आधार पर भारतीय दंड विधान कानून के 153 (ए) तथा 295( ए) आईपीसी धारा के तहत गिरफ्तार करने के लिए असम पुलिस को धन्यवाद ज्ञापन करता है लखीमपुर हिंदू युवा छात्र परिषद कि लखीमपुर जिला समिति । विज्ञप्ति में बताया गया है कि जो सत्र के सांस्कृतिक देव वाद्य, मांगलिक शब्द और गुरुजनों की वाणी की गरीमा को नष्ट कर उसे विकृत रूप मे परिवर्तित कर उसका यिशु नाम के नाम से नामकरण कर उसका संचालन कर क्रिश्चियन धर्म के प्रचार प्रसार करने की परंपरा को हिंदू युवा छात्र परिषद कभी भी स्वीकार नहीं करेगा। रंजन सूतीया द्वारा यीशु वाणी प्रचार करने की स्थान के नाम फलक में नामघर लिखा हुआ है। चूंकि लोगों में नामघरों की प्रति श्रद्धा है और नाम घर में जाने के लिए सभी श्रद्धा पूर्वक आसानी से तैयार हो जाते हैं । लोगों के इस धार्मिक विश्वास पर कुठाराघात करते हुए रंजन सुतिया ने ऐसा जाल रचा। इसके पीछे रंजन सुतिया की सीधे साधे हिंदू धर्म और नामघर में विश्वास रखने वाली आम जनता को भ्रमित करने की मंशा साफ झलकती है। भोले भाले लोगों को पहले मंत्र उपचार, झाड़-फूंक के जाल में फंसा कर फिर उन्हें अपने इस क्रिश्चियन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए नाम घर की संज्ञा देकर बनाया गए स्थान पर बुलाता है। नामघर में जाने के नाम पर बेहिचक लोग वहां आ जाते हैं। वहां आए लोगों को क्रिश्चियन धर्म के प्रचार प्रसार की गाथा सुनाता है। ताकि उन्हें हिंदू से क्रिश्चियन धर्म में परिवर्तित करने की अपने इरादे में कामयाब हो सके रंजन सूतीया। जबकि कहीं भी क्रिश्चियन धर्म के प्रचार स्थल को नामघर की संज्ञा नहीं दी जाती है।उस स्थान को गिरजाघर की संज्ञा दी जाती है।
हिंदू धर्म के ऐतिहासिक संस्कृति का दमन कर उसके सत्र के सांस्कृतिक देव वाद्य, मांगलिक शब्द और गुरुजनों की वाणी की गरीमा को नष्ट कर उसे विकृत रूप मे परिवर्तित कर उसके व्यवहार से चलाये जा रहे क्रिश्चियन धर्म का इस प्रकर प्रचार करना अन्यायपूर्ण तथा निंदनीय है ।दूसरी तरफ गुरुजनों की अनमोल वाणी , असमिया सुर - ताल ,खोल नगाड़ा लोक वाद्य ये सभी धार्मिक रूप से उपयोग किए जाने वाली चीजे हमारी संस्कृति की धरोहर है। जिन्हें हम अपने नामघरों और सांस्कृतिक क्रियाकलापों में व्यवहार करते हैं। इसका कोई और गलत ढंग से उपयोग करें और उस पर दूसरे धर्म की मुहर लगाये है हिंदू युवा छात्र परिषद को बर्दाश्त नहीं ।प्रेस विज्ञप्ति में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि बहुत दिन पहले से रंजन सुतिया झाड़-फूंक, जंत्र - मंत्र के द्वारा रोग और रोगियों के कई रोगों की चिकित्सा करने के नाम पर आम जनता को ठगते आ रहा है । चिकित्सा विज्ञान के इस आधुनिक युग में भी यंत्र - मंत्र और झाड़-फूंक द्वारा ग्रामीण अंचलों की लोगों की चिकित्सा कर करना असम सरकार के चिकित्सा विभाग की अवमानना है ।उन्होंने असम सरकार से इस विकसित युग में भी ग्रामीण अंचलों के सीधे साधे जनता की झाड़-फूंक द्वारा किए जा रहे हैं चिकित्सा पर रोक लगाने की मांग की है हिंदू युवा छात्र परिषद ने ।विज्ञप्ति में कहा गया है निरंजन सुतिया मंत्र झाड़-फूंक द्वारा चिकित्सा करने का उद्देश्य मात्र धन संग्रह ही नहीं बल्कि हिंदू लोगों को क्रिसचन धर्म में परिवर्तित करने का एक षड्यंत्र है। उसने झाड़-फूंक के द्वारा बीमार रोगियों को ठीक करने का दावा कर और उन्हें धार्मिक बताते हुए क्रिसचन धर्म में परिवर्तित होने का गोपनीय उपदेश देता है। यह सब करके बहुत ही कम दिनों के अंदर रंजन सूतिया आर्थिक रूप से विशाल साम्राज्य का धनी हो चुका है। रंजन सूतीया का कुछ ही दिनों में आपार धन संग्रह करने पर हिंदू युवा छात्र परिषद ने जिला उपायुक्त से उच्च स्तरीय जांच के आदेश देने का अनुरोध किया है।








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