गुवाहाटी। पूर्वोत्तर सीमा रेल (पूसीरे) का गुवाहाटी-लमडिंग खंड (लगभग 180 किलोमीटर ) रेलवे परिवहन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस खंड में ऊपरी असम और दक्षिण असम जिलों के अलावा मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और नगालैंड जैसे पूर्वोत्तर राज्यों के लिए माल और यात्री ट्रेनों का आवागमन होता है।
पूसीरे की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी गुनीत कौर ने शुक्रवार को कहा है कि ट्रेनों की बढ़ती संख्या के कारण, यह खंड, जो पहले सिंगल लाइन बीजी खंड हुआ करता था, ट्रेन परिचालन में बाधाओं का सामना कर रहा था। इस समस्या को कम करने के लिए इस खंड के दोहरीकरण को मंजूरी दी गई तथा खंड को विभिन्न हिस्सों में बांट कर कार्य शुरू किया गया।
वर्ष 2015-16 के रेल बजट में 102 किलोमीटर लम्बे डिगारू-होजाई खंड के दोहरीकरण को मंजूरी दी गई थी। इस परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने 10 नवम्बर, 2016 को किया था। इस खंड में 36 लाख घन मीटर भूमि कार्य के अलावा 11 बड़े, 73 छोटे और 05 सड़क ऊपरी पुल का निर्माण शामिल हैं। कार्य की संशोधित अनुमानित लागत 2,136 करोड़ रुपये से अधिक है।
वर्ष 2020-21 के दौरान कुल 50.87 किलोमीटर रेल पथ को पहले ही चालू कर दिया गया है। अब व्यापक योजना बनाकर वित्तीय वर्ष 2021-22 के अंदर पूरे खंड का दोहरीकरण कर दिए जाने की संभावना है। 102 किमी लंबे डिगारू-होजाई खंड के दोहरीकरण का काम पूरा हो जाने पर लमडिंग मंडल के अधीन आने वाले इस खंड में ट्रेन परिचालन की क्षमता बढ़ जाएगी। ट्रेनों की क्रॉसिंग के समय में होने वाली बचत के कारण यात्रा समय में भी काफी कमी आएगी। ऊपरी असम और दक्षिण असम क्षेत्रों के अलावा मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और नगालैंड जैसे राज्यों के लिए ज़्यादा से ज़्यादा मालगाड़ियों का परिचालन किया जा सकेगा। बेहतर रेल संपर्क से इन क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति भी समृद्ध होगी। (हि.स.)







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