गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमांता बिस्व सरमा ने वर्ष के पहले दिन कहा कि राज्य के युवा 'असमिया भाषा में असम पब्लिक सर्विस कमीशन (एपीएससी) की परीक्षा दे सकते हैं।' साथ ही उन्होंने असम समझौता, असमिया भाषा और छह समुदायों के आदिवासीकरण के मुद्दे पर भी खुलकर मीडिया के सवालों का जवाब दिया।
अंग्रेजी नव वर्ष के पहले दिन यहां कोईनाधारा स्थित गेस्ट हाउस नंबर-1 में राज्य के पत्रकारों के साथ परिचर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने नए साल में सरकार द्वारा की जाने वाली कार्रवाई के बारे में भी विस्तार से बताया। असम लोक सेवा आयोग, असमिया भाषा, असम समझौते के खंड छह और छह समुदायों के आदिवासीकरण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सरकार की मंशा को बताया।
मुख्यमंत्री ने असम समझौते के खंड छह और छह समुदायों के आदिवासीकरण के बारे में कहा कि 'हम असम समझौते के खंड छह के साथ आगे नहीं बढ़ पाए हैं। हम आसू से बात कर रहे हैं। वर्तमान आदिवासियों ने छह समुदायों के आदिवासीकरण को रोक रहे हैं। उनका दावा है कि ऐसा होने से उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। हम छह समुदायों के जातिकरण की रिपोर्ट केंद्र को नहीं दे सकते। ऐसा करने पर असम के लोगों के बीच मनमुटाव बढ़ेगा।'
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'अब से असमिया भाषा में असम लोक सेवा आयोग की परीक्षा अभ्यर्थी दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में नहीं आई होती तो क्या मौलाना बदरुद्दीन अजमल असमिया भाषा को यह दर्जा दे सकते हैं? मेडिकल, इंजीनियरिंग आदि सभी प्रवेश परीक्षाएं असमिया में आयोजित की जाएंगी। असम में अब कोई भी बुरी बातें करने की हिम्मत नहीं करता। पिछला दिन अलग था। उन्होंने कहा कि एपीएससी की नौकरी केवल असमिया लोगों को ही मिलेगी। असमिया जाति को किसी को और तोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह पहले ही बहुत छोटा हो गया है। असमिया भाषा की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। लोगों को यह करना होगा। लोग असमिया स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाएं। सरकार सबके लिए है।
मुख्यमंत्री हिमंत डॉ. सरमा ने अफस्पा के संदर्भ में कहा, 'हम केंद्र सरकार के साथ बातचीत करेंगे जब चार महीने बाद असम में अफस्पा का नवीनीकरण होगा। राज्य में इसे कहां-कहां से हटाया जा सकता है इसको लेकर चर्चा की जाएगी। ज्ञात हो कि राज्य के कुछ पड़ोसी सीमावर्ती इलाकों में अभी भी अफस्पा कानून लागू है। मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड आदि से लगे राज्यों के सीमा क्षेत्रों में यह कानून अभी भी बहाल है। राज्य के अधिकांश हिस्सों से इसे उठा लिया गया है।(हि.स.)







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