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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेल को दी गई है प्राथमिकता : प्रधानमंत्री मोदी



मेरठ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और प्रोफेशन के तौर पर युवाओं को खेलों को चुनने के लिये प्रेरित करते हुये कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में खेल को प्राथमिकता दी गई है।

प्रधानमंत्री मोदी रविवार को मेरठ के सरधना में उत्तर प्रदेश के पहले खेल विश्वविद्यालय की आधारशिला रखने के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। 700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला यह विश्वविद्यालय मेरठ के सरधना कस्बे के सलावा और कैली गांव में स्थापित किया जा रहा है। यहां से हर साल एक हजार युवा खिलाड़ी बनकर निकलेंगे।

प्रधानमंत्री ने पिछले सात दशकों में केंद्र और राज्यों में सरकारों द्वारा खेल और खिलाड़ियों के प्रति उदासीन रवैये अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि खेलों के प्रति सोच और समझ सीमित होने के कारण लोगों की खेलों के प्रति बेरुखी बढ़ती गई। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने बीते वर्षों में भारत के खिलाड़ियों को संसाधन, ट्रेनिंग की आधुनिक सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर और चयन में पारदर्शिता जैसे चार शस्त्र दिये हैं।

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पिछली सपा सरकार पर तंज कसते हुये उन्होंने कहा कि उस समय प्रशिक्षण से लेकर चयन तक, 'भाई-भतीजावाद' था और कोई पारदर्शिता नहीं थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में अब 'खेलो इंडिया' के जरिए देश के कोने-कोने में प्रतिभाशाली युवाओं की पहचान हो रही है।

उन्होंने कहा कि देश में खेलों के लिए जरूरी है कि हमारे युवाओं में खेलों को लेकर विश्वास पैदा हो, खेल को अपना प्रॉफ़ेशन बनाने का हौसला बढ़े। यही मेरा संकल्प भी है, और सपना भी! मैं चाहता हूं कि जिस तरह दूसरे प्रॉफ़ेशन्स हैं, वैसे ही हमारे युवा स्पोर्ट्स को भी देखें। उन्होंने कहा कि जो नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लागू हो रही है, उसमें भी खेल को प्राथमिकता दी गई है। स्पोर्ट्स को अब उसी श्रेणी में रखा गया है, जैसे साईंस, कॉमर्स या दूसरी पढ़ाई हो। पहले खेल को एक्स्ट्रा एक्टिविटी माना जाता था, लेकिन अब स्पोर्ट्स स्कूल में बाकायदा एक विषय होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद के 7 दशकों में पहली बार 2018 में जाकर पहला खेल विश्वविद्यालय मणिपुर में उनकी सरकार द्वारा स्थापित किया गया। उन्होंने कहा कि हमें खेलों का 'इको सिस्टम' बनाना होगा और उसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी इस दिशा में एक कदम है।

प्रधानमंत्री ने राज्य की कानून व्यवस्था खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पलायन को लेकर सपा सरकार पर निशाना साधते हुये कहा कि पहले यहां अवैध कब्जे के टूर्नामेंट होते थे, बेटियों पर फब्तियां कसने वाले खुलेआम घूमते थे। अब योगी जी की सरकार अपराधियों से जेल-जेल खेल रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरठ और आसपास के क्षेत्रों के लोग कभी भूल नहीं सकते कि लोगों के घर जला दिए जाते थे और पहले की सरकार अपने खेल में लगी रहती थी। पहले की सरकारों के खेल का ही नतीजा था कि लोग अपना पुश्तैनी घर छोड़कर पलायन के लिए मजबूर हो गए थे। उन्होंने कहा कि पांच साल पहले इसी मेरठ की बेटियां शाम होने के बाद अपने घर से निकलने से डरती थीं। आज मेरठ की बेटियां पूरे देश का नाम रौशन कर रही हैं।

प्रधानमंत्री ने बदलते भारत का नया मंत्र देते हुये कहा कि 21वीं सदी के नये भारत में सबसे बड़ा दायित्व युवाओं के पास है। युवाओं को नये भारत के कर्णधार बताते हुये कहा कि जिधर युवा चलेगा, उधर भारत चलेगा और जिधर भारत चलेगा, उधर ही अब दुनिया चलने वाली है।

प्रधानमंत्री ने गन्ना किसानों को साधते हुये डबल इंजन सरकार की उपलब्धियां बताते हुये कहा कि योगी सरकार में जितना गन्ना भुगतान हुआ है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने गन्ना भुगतान को लेकर मायावती और अखिलेश सरकार पर हमला करते हुये कहा कि जो पहले सत्ता में थे उन्होंने आपको गन्ने का मूल्य किस्तों में तरसा-तरसा कर दिया। पहले की सरकारों में चीनी मिलें कौड़ियों के भाव बेची जाती थीं। योगी सरकार में मिले बंद नहीं होती हैं, मिलों का विस्तार होता है।

पूर्व की सरकारों पर तीखा व्यंग्य करते हुये प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यहां मेरठ के सोतीगंज बाजार में गाड़ियों के साथ होने वाला खेल भी अब समाप्त हो रहा है। अब उप्र में असली खेल को बढ़ावा मिल रहा है। यहां के युवाओं को खेल की दुनिया में छा जाने का मौका मिल रहा है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि भारत के इतिहास में मेरठ का नाम सिर्फ एक शहर का नहीं है, बल्कि मेरठ हमारे सामर्थ्य का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। मेरठ ने दुनिया को यह दिखाया है कि भारत का सामर्थ्य क्या है। मेरठ से 100 से अधिक देशों को खेल सामग्री के निर्यात का उल्लेख करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरठ लोकल को ग्लोबल बना रहा है।

उन्होंने कहा कि मेरठ देश की महान संतान मेजर ध्यानचंद की कर्मस्थली रही है। कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार का नाम दद्दा (मेजर ध्यानचंद) के नाम पर किया था। आज मेरठ का खेल विश्वविद्यालय मेजर ध्यान चंद जी को समर्पित किया जा रहा है। अपने संबोधन में उन्होंने चौधरी चरण सिंह का भी स्मरण किया।

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