गुवाहाटी। असम सचिवालय (जनता भवन) में बतौर सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट तैनात सीमा देवी को रिश्वत लेते हुए मंगलवार को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। सचिवालय के बोड़ोलैंड वेलफेयर डिपार्टमेंट में कार्यरत सीमा को विजिलेंस एंड एंटीकरप्शन निदेशालय द्वारा घात लगाकर गिरफ्तार किया गया।
डब्ल्यू पीटी एंड बीसी विभाग के एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी रोबिन सिंह थापा ने शिकायत की थी कि उनके वेतन संबंधी फाइल की प्रोसेसिंग के लिए सीमा ने 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए निदेशालय की एक टीम ने सीमा को रंगे हाथों पकड़ लिया। सीमा के पास से थापा द्वारा दिये गये 4000 रुपये भी बरामद किये गये। सीमा के बैग से और 99000 रुपये नकद बराबर किये गए। हालांकि, निदेशालय की टीम द्वारा शिकायतकर्ता थापा को भी हिरासत में ले लिया गया।
सीमा के विरुद्ध इस सिलसिले में एसीबी थाने में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 (2018 संशोधित) की धारा 7 (ए) 13 (2) के तहत केस नं. 04/01/2022. दर्ज की गई। सीमा की गिरफ्तारी दोपहर 01 बजकर 05 मिनट पर हुई। इस गिरफ्तारी से पूरे सचिवालय परिसर में सनसनी फैल गई।
वर्ष के पहले सप्ताह में इस प्रकार की हुई गिरफ्तारी से राज्य के सरकारी कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों को सबक लेनी चाहिए। राज्य की भाजपा सरकार बीते 6 वर्षों से भ्रष्टाचार पर शून्य सहनशीलता की बात कहती रही है। गाहे-बगाहे एंटी करप्शन डिपार्टमेंट की टीम द्वारा गिरफ्तारियां भी हुई है। फिर भी सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार पर कोई लगाम नहीं लग सका है। कर्मचारी खुलकर रिश्वत नहीं मांगते हैं, लेकिन काम भी नहीं करते हैं। लोगों को वर्षों तक एक छोटे से काम के लिए चक्कर लगाना पड़ता है। यही वजह है कि लोग इस चक्कर काटने से बचने के लिए सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत देते हैं।
यदि सही मायने में असम सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना चाहती है तो उसे सरकारी कार्यालयों में लोगों का काम हो, यह सुनिश्चित करना पड़ेगा। कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर भय पैदा करना होगा कि यदि कोई भी नागरिक कार्यालयों में काम से वंचित रहता है तो कर्मचारियों को महंगा पड़ेगा। जब तक सरकार यह संदेश देने में कामयाब नहीं हो पाती है तब तक भ्रष्टाचार पर शून्य सहनशीलता की बात करना महज एक छलावा साबित होगा। (हि.स.)







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