गुवाहाटी। भारतीय और हिंदू संस्कृति अद्वितीय है। सबसे पुरानी, बड़ी हिंदू संस्कृति ही पूरी दुनिया को रास्ता दिखा सकती है। हम हिंदू संस्कृति के ध्वज वाहक और संरक्षक हैं। इसलिए अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए नारी शक्ति को जागृत, संगठित और सक्षम बनाना होगा। ये बातें आज राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय प्रमुख संचालिका शांता अक्का ने कही। शांता अक्का आज स्थानीय माहेश्वरी भवन में राष्ट्र सेविका समिति की गुवाहाटी महानगर समिति द्वारा आयोजित मकर संक्रांति कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में हिस्सा लिया।
उन्होंने भारतीय मकर संक्रांति के महत्व का विश्लेषण करते हुए इस दिन को कैसे मनाते हैं इस बारे में बताया। उन्होंने कहा कि संक्रांति का एक विशेष महत्व एक-दूसरे के बीच अच्छे संबंधों का बंधन है। जिस तरह इस तिथि को दिन और रात बराबर होती है, उसी तरह शरीर और मन भारत के सभी हिस्सों के बराबर महसूस करते हैं। वे आपस में एकजुट महसूस करते हैं। विविधता से भरे देश के लोगों को समानता के आदर्श से प्रोत्साहित किया जाता है। यह हिंदू संस्कृति की विशेषता है। उन्होंने अन्य कई उदाहरणों के जरिए अपनी बातों को सामने रखा।
शांता अक्का ने कहा कि देश आज आजादी के अमृत महोत्सव का जश्न मना रहा है। हमें राजनीतिक आजादी मिली, हमें पूरी आजादी नहीं मिली। हम एक जनवरी को अंग्रेजी नववर्ष क्यों मनाते हैं? यह एक गुलामी का प्रतीक है। गुलाम मानसिकता देश छोड़ने में सक्षम नहीं है। हमारा अपना नववर्ष है। शांता अक्का ने भारतीय नववर्ष को मनाने का आह्वान किया है।
आज के आयोजन की शुरुआत ध्वजारोहण, सेविका प्रार्थना, एकल संगीत और पूर्ण गणवेश धारिणी सेविकाओं द्वारा शारीरिक व्यायाम से हुआ। मंच पर शांता अक्का के साथ संगठन की उत्तर असम प्रांत संचालिका डॉ. नीलिमा गोस्वामी भी मौजूद थीं। इस अवसर पर लगभग 200 पूर्ण गणवेश सेविकाओं के अलावा दो अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका सुनीता हाल्देकर व चित्राताई जोशी, प्रांत प्रचारक एवं अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख नीता देवी आदि मौजूद थीं।







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