ओमप्रकाश तिवारी व राजेश राठी
केंद्रिय सरकार ने बाढ़ प्रबंधन योजना (FMP) के तहत लखीमपुर में रंगानदी बांध के निर्माण और सरलीकरण के लिए 361 करोड़ रुपये आवंटित किए थे लेकीन दुर्भाग्य की बात यह है कि उक्त योजना के तहत निर्माण की गई करोड़ो रुपयों की लागत से गाइड बांध अब धाराशाही होने के कगार पर आ चुकी है जो स्थानिया लोगो के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। मालुम हो की लखीमपुर जिले के दीजू के पास खोनाजान में रंगानदी से आम जनजीवन के जानमाल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रूपोहीजान गाइड बांध नामक एक सुरक्षा बांध का निर्माण कार्य उसी योजना के तहत किया गया था। सन् 2014-15 में इस योजना के लागू होने के बाद संबंधित एवं निविदाकर्ता ठेकेदार द्वारा 1,740 मीटर लंबे गाइड बांध का पुरी तरह निर्माण कार्य पूरा किया गया था जो बर्तमान में आम जनजीवन के लिए खतरे की घंटी बनी हुई है। 3.44 करोड़ रुपयो की लागत से मिट्टी द्वारा निर्मित रूपोहीजान गाइड बांध के निर्माण के बाद समन्धित ठेकेदार को 65 प्रतिशत राशि आवंटित भी की जा चुकी है। लेकीन दुर्भाग्य की बात यह है कि इस साल हुई भारी बारिश के कारण इस बांध के नीचे से काफी मिट्टी नदी के गर्व गृह में समाहित हो चुकी है तथा उक्त बांध के ऊपर बड़े बड़े रैनकट अर्थात दरारें भी पड़ चुकी है जो किसी भी वक्त प्रलय उत्पन कर सकती है। गौर करने वाली बात यह है कि सरकार तो नदी बांध के निमार्ण के लिए अच्छी खासी धनराशि आवंटित कर रही है लेकीन कुंभकर्णी निंद्रा में लीन टांग पर टांग दे कर अपनी खुर्शी से चिपक कर जनता द्वारा दिए गय टैक्स के पैसों से अपना वेतन लेने वाले जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने उक्त गाइड बांध की मरम्मत के लिए किसी प्रकार की कोई कार्रवाई करती नजर नही आ रही है। अब देखना यह है कि क्या सरकार घोड़े बेच कर सोने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों पर किसी प्रकार की कोई व्यवस्था ग्रहण कर उक्त बांध की मरम्मत करवा कर सुरक्षित कर पाती है या नही ।







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